अरविंद कुमार ने खुद को शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय का ड्राइवर बताया था। अरविंद ने छोटे भाई शुभम की पंचायती विभाग में टाइपिस्ट की नौकरी लगवाने का झांसा दिया था। इसके लिए करीब पांच लाख रुपये का खर्च की बात कही। अरविंद को पहले तीन लाख रुपये नकद और बाद में एक लाख 30 हजार रुपये बैंक खाते में स्थानांतरित किए।
इसके बाद बार-बार कहने के बावजूद आरोपी ने न तो नौकरी लगवाई और न ही ऐसा कोई दस्तावेज दिया। इसके विपरीत अरविंद 50 हजार रुपये की आखिरी किश्त देने का दबाव बना रहा था। आरोपी ने सोमवार को आईएसबीटी पर रकम लेकर आने को कहा था। शक होने पर पीड़ित पक्ष ने पुलिस को विश्वास में लेकर 50 हजार की रकम लेने पहुंचे अरविंद कुमार और उसके साथी दिलीप कुमार उर्फ बबलू को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दोनों का चालान कर दिया है।
पीड़ित पक्ष शिकायत लेकर शिक्षा मंत्री के ऑफिस पहुंचा था, जहां पर पता चला कि आरोपी अरविंद सफेद झूठ बोल रहा है। शिक्षा मंत्री के पीआरओ ने एसपी सिटी श्वेता चौबे से बात कर पूरे मामले में कार्रवाई का अनुरोध किया था। एसपी चौबे ने पटेलनगर और आईएसबीटी पुलिस को आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। पुलिस भी सुबह से इन ठगों की इंतजार में थी।
10वीं फेल हैं दोनों आरोपी
डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि दोनों आरोपियों से सख्ती से पूछताछ की जा रही है, ताकि इस नेटवर्क से जुडे़ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वाले दोनों आरोपी खुद 10वीं फे ल हैं। विश्वास कायम करने को आरोपी शिक्षा मंत्री के नाम का इस्तेमाल करते थे। यह बेहद गंभीर मामला है, तह तक जाकर कार्रवाई की जाएगी।
आवेदन और परीक्षा बिना कैसे लगेगी नौकरी
सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की घटनाओं पर अंकुश लगाने को पुलिस कई बार एडवाइजरी जारी कर चुकी है। बावजूद इसके लोग झांसे में आकर ठगी का शिकार बन रहे है। एसपी सिटी श्वेता चौबे का कहना है कि लगातार प्रचार किया जा रहा है कि आवेदन और परीक्षा के बिना सरकारी नौकरी मिलना संभव नहीं है। कम से कम से अपने स्तर से इस बात की पुष्टि करा ली जाए कि क्या संबंधित विभाग में भर्ती चल रही है या नहीं। तहकीकात किए बिना ही लोग ठगों को मुंह मांगी रकम उपलब्ध करा रहे हैं। यह बात सर्वविदित है कि चोर दरवाजे से सरकारी नौकरी मिलना नामुमकिन है।