उत्तराखंड शिक्षा विभाग में बीटीसी की फर्जी अंकतालिका और अन्य फर्जी दस्तावेज लगाकर नियुक्ति पाने वाले 17 शिक्षकों के खिलाफ डेढ़ साल बाद भी जांच अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर सके।
घोटाले की जांच के लिए अब तक तीन विवेचक नियुक्त हो चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, इतना समय बीतने के बाद भी जांच अधिकारियों ने शिक्षा विभाग से प्राथमिक जांच रिपोर्ट भी प्राप्त नहीं की। अब जांच एसआईटी को सौंपी गई है।
वर्ष 2016 में शिक्षा विभाग में बीटीसी की फर्जी अंकतालिका और अन्य फर्जी दस्तावेजों से शिक्षकों के भर्ती होने का मामला प्रकाश में आया था। शिक्षा विभाग की ओर से मामले की छानबीन करने के बाद विभिन्न क्षेत्रों के 17 लोगों के फर्जीवाड़ा कर पंतनगर क्षेत्र में बतौर शिक्षक नियुक्ति पाने की पुष्टि हुई। इसके बाद शिक्षा विभाग ने सभी 17 शिक्षकों की सेवा समाप्त कर 16 अक्तूबर 2016 को पंतनगर थाने में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच के लिए तत्कालीन सिडकुल चौकी प्रभारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। 11 माह तक जांच में कोई प्रगति नहीं हुई तो दूसरे दरोगा को जांच सौंपी गई, लेकिन फिर भी पांच महीने तक जांच लटकी रही। इसके बाद फिर जांच अधिकारी बदला गया, लेकिन यह भी करीब तीन माह की जांच में कोई नतीजा नहीं निकाल पाए।
करीब डेढ़ वर्ष की जांच के नतीजों पर गौर करें तो जांच अधिकारी अब तक मात्र वादी के बयान दर्ज करने के सिवा कुछ नहीं कर पाए हैं। जांच को आगे बढ़ाने के लिए विवेचकों ने न ही शिक्षा विभाग से प्राथमिक जांच रिपोर्ट ली और न मामले से जुड़े दस्तावेज जुटाए। इस वजह से डेढ़ वर्ष बाद भी जांच अधर में लटकी है। शायद इसी कारण अब एसआईटी का गठन करना पड़ा है।