पहाड़ और मैदान के बीच लटका भाषा संस्थान
उत्तराखंड भाषा संस्थान पहाड़ और मैदान की राजनीति में लटक गया है। कुछ लोग इसे पहाड़ में बनाना चाहते हैं। उनका कहना है कि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया गया है। इसके बाद वहां विभिन्न संस्थानों की स्थापना की प्रक्रिया शुरू होगी। गैरसैंण में उत्तराखंड भाषा संस्थान की स्थापना की घोषणा इसी दिशा में बढ़ाया गया कदम है, लेकिन कुछ का कहना है कि पहाड़ में जाने को कोई तैयार नहीं है। यदि संस्थान का मुख्यालय गैरसैंण में बनाया गया तो यह कुछ समय बाद खंडहर में तब्दील हो जाएगा।
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अपनी बोली भाषा को नहीं मिल पाया बढ़ावा
गढ़वाली, कुमाऊंनी भाषा एवं साहित्य पर कई विश्वविद्यालयों में पीएचडी शोध ग्रंथ लिखे जा चुके हैं। वर्ष 1913 में गढ़वाली भाषा का प्रथम समाचार पत्र गढ़वाली समाचार प्रकाशित हुआ। इसके अलावा भी इसकी कई साहित्यिक पृष्ठभूमि है, लेकिन राज्य गठन के 24 साल बाद भी अपनी बोली-भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं हुए।