ऐसे में यह उत्तरांचल लोक संपत्ति विरुपण अधिनियम के तहत अपराध है। इस मामले में पिछले साल नौ दिसंबर को शूरवीर सजवाण के खिलाफ आरोप तय किए गए। सजवाण ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इन्कार किया।
अभियोजन की ओर से इस मामले में एक भी गवाह प्रस्तुत नहीं किया गया। अदालत ने अभियोजन को पूरा समय दिया लेकिन 19 साल में अभियोजन इस बात को साबित नहीं कर पाया कि ये पोस्टर आरोपी ने लगवाए थे। ऐसे में अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में शूरवीर सजवाण को बरी कर दिया।