पिछले 14 घंटों से अधिक समय से केदारनाथ धाम में बर्फबारी ने बाबा केदार की यात्रा को व्यापक रूप से प्रभावित करते हुए रोक दिया है। धाम में करीब एक फीट बर्फ जम चुकी है। लगातार गिर रही बर्फ से यहां कड़ाके की ठंड पड़ रही है। प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से 4272 यात्रियों को पैदल मार्ग से गौरीकुंड-सोनप्रयाग के लिए भेज दिया है। जबकि 450 यात्री अब भी धाम में रुके हैं, जिनमें बुर्जुग व छोटे बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व सीएम हरीश रावत, राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा, केदारनाथ के विधायक मनोज रावत, नोडल अधिकारी, सेक्टर मजिस्ट्रेट, पुलिस व तीर्थ पुरोहितों सहित 8 सौ से अधिक अन्य लोग भी मौजूद हैं। बर्फबारी से केदारनाथ में गढ़वाल मंडल की टेंट कालोनी को भी भारी नुकसान हुआ है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के तहत सोमवार रात्रि 2 बजे से केदारनाथ में बर्फबारी हो रही है। रुक-रुककर मध्यम व तेज बर्फ के बीच मंगलवार सुबह 5 बजे से श्रद्धालु मंदिर में बाबा केदार के दर्शनों को पहुंचने लगे थे। लेकिन दिन चढने के साथ मौसम और खराब होने लगा, जिस कारण प्रशासन द्वारा मंदिर में एकत्रित हो रहे श्रद्धालुओं को अपने-अपने कमरों में जाने के लिए कहा गया। मंदिर में दर्शनों के लिए लाइन नहीं लगने दी गई। भले ही इस दौरान दो, चार श्रद्धालु बाबा के दर्शन करते रहे। लगातार बिगड़ते मौसम को देखते हुए उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान व चौकी प्रभारी बिपिन चंद्र पाठक द्वारा जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक से फोन पर वार्ता के बाद प्रात: 11 बजे से केदारनाथ धाम को खाली कराने की कार्रवाई शुरू की गई।
प्रशासन द्वारा 4272 श्रद्धालु, जिसमें सुबह के समय लिनचोली से धाम पहुंचे 808 श्रद्धालु शामिल हैं, को दर्शन करने के बाद पैदल मार्ग से वापस भेजना शुरू किया। दोपहर 12 बजे केदारनाथ धाम अधिकांश खाली हो गया था। यहां जो लोग रुके हुए हैं, वे भी दिनभर कमरों में दुबके रहे। दूसरी तरफ पैदल मार्ग से वापस भेजे गए यात्रियों को गौरीकुंड व सोनप्रयाग तक सकुशल पहुंचाने के लिए रुद्रा प्वाइंट, छानी कैंप, लिनचोली, रामबाड़ा, भीमबली, जंगलचट्टी, चीरबासा में पुलिस, एसडीआरएफ और पीआरडी जवानों के माध्यम से फीडबैक लिया जा रहा है। उप जिलाधिकारी चौहान ने बताया कि धाम से पैदल भेजे गए श्रद्धालुओं में ज्यादातर रामबाड़ा व भीमबली तक पहुंच गए हैं। धाम में 450 यात्री ही रुके गए हैं, इनमें बुर्जुग व बच्चे हैं, जो पैदल चलने में असमर्थ हैं। इन सभी के ठहरने व भोजन की उचित व्यवस्था कर दी गई है। साथ ही उनके परिजनों से भी बातचीत कराई जा रही है। मौसम साफ होने पर इन्हें हेलीकॉप्टर से भेजा जाएगा। खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर सेवा भी दिनभर बंद रही। इधर, जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि केदारनाथ में स्थिति पूरी तरह से सामान्य है। सुरक्षा के लिहाज से पूरी सतर्कता बरती जा रही है।
साढ़े 9 बजे से पड़ावों पर रोके यात्री
मंगलवार को बाबा केदार के दर्शनों के लिए सोनप्रयाग से प्रशासन द्वारा 2242 यात्रियों को रवाना किया गया। लेकिन घाटी क्षेत्र में तेज बारिश और धाम में बर्फबारी को देखते हुए प्रात: 9.30 पर यात्रियों को जंगलचट्टी, भीमबली व लिनचोली में रोक दिया गया था।
बदरीनाथ धाम में मंगलवार को दिनभर बर्फबारी का सिलसिला जारी रही। धाम में करीब एक फीट बर्फ जम गई है। हनुमान चट्टी तक बर्फबारी होने से यात्रा वाहनों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया है। वहीं, हेमकुंड साहिब में भी करीब डेढ़ फीट तक ताजी बर्फ जम गई है। यहां यात्रा तैयारियां शुरू नहीं हो पाई हैं।
धाम में मंगलवार तड़के से ही बर्फबारी शुरू होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। ठंड से बचने के लिए तीर्थयात्री अपने कमरों में ही दुबके रहे, जबकि गंतव्य को लौटने वाले तीर्थयात्री वाहनों में बैठकर ही बदरीनाथ हाईवे के सुचारु होने का इंतजार करते रहे। धाम में अभी भी करीब 80 वाहन अपने गंतव्य को जाने के लिए हाईवे पर लाइन लगाकर खड़े हैं। बदरीनाथ के थानाध्यक्ष अनिल जोशी ने बताया कि बर्फबारी से बदरीनाथ हाईवे फिसलनभरा हो गया है, जिससे वाहनों के रपटने का डर बना हुआ है।
कंचन गंगा, रड़ांग बैंड और हनुमान चट्टी में भी हाईवे पर बर्फ जम गई है, ऐसे में यात्रा वाहनों को रोक दिया गया है। बुधवार को मौसम सामान्य होने के बाद यात्रियों को उनके गंतव्य को जाने दिया जाएगा। वहीं, औली, गोरसों बुग्याल, रुद्रनाथ, नंदा घुंघटी सहित नीती घाटी के गांवों में भी बर्फबारी हुई है।
गोपेश्वर में सात मई को हुए आंधी-तूफान से चमोली जिले में अभी भी स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है। जगह-जगह बिजली के तार गिरने से 14 गांवों में विद्युत आपूर्ति ठप पड़ी है। पीपलकोटी क्षेत्र में विद्युत लाइनों को अधिक क्षति पहुंची है। गोपेश्वर में दूरसंचार विभाग के टावर के ऊपर पेड़ गिरने से संचार सेवा बंद हो गई है। पीपलकोटी क्षेत्र में 11 केवी की विद्युत लाइन कोड़िया, ग्रेफ कैंप और पीपलकोटी में पेड़ गिरने से ध्वस्त हो गई थी।
मंगलवार को भी विद्युत लाइन सुचारु नहीं हो पाई है। वहीं, गत दो मई को आंधी-तूफान से डुंगरी-बरोसी क्षेत्र में यूपीपीसीएल (उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन) की हाईटेंशन लाइन से क्षेत्र में सप्लाई हो रही 11 केवी की विद्युत लाइन में अतिरिक्त करंट दौड़ गया था, जिससे आठ ट्रांसफार्मर फुंक गए थे। पैनी, तल्ला व मल्ला हेलंग में दो ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊर्जा निगम की ओर से विद्युत आपूर्ति सुचारु कर दी गई थी, लेकिन अन्य सलूड़, डुंग्रा, डुंग्री, बरोसी, कुट-मंगरा और जखोला गांव अभी भी सप्लाई ठप है। ऊर्जा निगम के ईई कैलाश कुमार का कहना है कि पीपलकोटी क्षेत्र में विद्युत तार और पोल लगाने का काम जारी है। जल्द ही जिले में विद्युत आपूर्ति सुचारु कर दी जाएगी।