सवाल- आपकी पार्टी के तमाम लोग गए, क्या आपको कभी ऐसा प्रलोभन, मौका आया कि आप जॉइन कर लीजिए?
जवाब- देखिए, मेरे विषय में सबको मालूम है कि दो चीज नहीं कर सकता, कांग्रेस और गांधी-नेहरू परिवार को नहीं छोड़ सकता। मैं साफ कह रहा हूं कि जूता
मारेंगे, थूकेंगे, तब भी ..हां इसके बाद मां की भी गाली देंगे मुझे अपमान महसूस होगा तो हो सकता है कि प्रारब्ध में कुछ लिखा हो। वरना हम तो यही कामना करते हैं कि जो हमने 60 साल पहले कांग्रेस का झंडा थामा था, उसी झंडे से लिपटकर जाना चाहेंगे। हम चाहते हैं कि 10-5 साल जो भगवान हमें बोनस का समय देगा, उसमें हम कांग्रेस का झंडा थामकर चल लें। ये जो राजनीतिक चिकोटीबाज हैं, उन्हें मैं वर्षों से झेलता आया हूं। मेरी जांघों में बहुत ताकत है। मैं ऐसे चिकोटियों का मुकाबला करना जानता हूं। कभी-कभी दोनोंm लातें चलती हैं। दाईं भी, बाईं भी, इलाज समय कर देगा।
सवाल- आपको नहीं लगता कि कहीं न कहीं इस लड़ाई में आप अकेले से पड़ गए हैं?
जवाब- पार्टी का कोई नेता आपको सपोर्ट नहीं कर रहा है?मेरे साथ मेरा विवेक है, मेरा ईमान है। मेरी मां है। मेरे साथ उत्तराखंड के लोग हैं। मैं तो बीमार था। डॉक्टर ने मुझे एडवाइज किया है कि आप छह सीढ़ी से ज्यादा नहीं चढ़ेंगे। ऐसी स्थिति में छह सीढ़ी तो छोड़ो मैं दौड़ रहा हूं। मेरे लिए जीवन महत्वपूर्ण नहीं है। मेरे लिए महत्वपूर्ण ये है कि जिस कलंक को भाजपा ने मुझ पर लगाने का प्रयास किया है, उस कलंक से मुक्त हो जाऊं। 42 हजार से ज्यादा लोगों को हमने नियुक्तियां दीं। एक दिखाओ कि कोई
बता दें कि हमारे पास कोई आया होगा तो हमारी ही चाय पीकर गया है। नौकरियों के मामले में हमने फैसला लिया। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग हमने बनाया। राज्य लोक सेवा आयोग के एग्जाम नहीं हुए थे। हमने भर्ती बोर्ड बनाए। सबको स्पष्ट निर्देश थे कि कोई हस्तक्षेप न करे। उन दिनों भर्ती बोर्ड, नौकरियों को लेकर बहुत से मामले सामने आ रहे थे, मैं नहीं चाहता था कि कोई कलंक हमारे उत्तराखंड पर लगे।