रूलक की ओर से दायर प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि आरटीआई से पता चला है कि पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं।
इनमें सबसे अधिक धनराशि पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी और सबसे कम धनराशि विजय बहुगुणा के नाम पर खर्च की गयी है।
संस्था के अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि कोर्ट में पेश शपथपत्र में कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के नाम पर 3.70 करोड़, एनडी तिवारी के नाम पर 2.39 करोड़, रमेश पोखरियाल निशंक के नाम पर 2.17 करोड़, भुवन चंद्र खंडूड़ी के नाम पर 2.81 करोड़ और विजय बहुगुणा के नाम पर 1.11 करोड़ रुपए विभिन्न मदों में खर्च किए गए हैं।
इन मदों में वाहनों के रखरखाव, देहरादून से बाहर जाने पर ईंधन खर्च, टैक्सी खर्च, चालकों का वेतन, कर्मचारी मद, बिजली का खर्च, टेलीफोन खर्च, सुरक्षा गार्ड के नाम पर होने वाले खर्चे शामिल हैं। संस्था ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को दिल्ली में मिलने वाली वाहन सुविधा पर रोक लगाने की मांग की है।
अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्ता के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्रियों से आवास किराया वसूली के मामले में प्रदेश सरकार ने सरकारी आवास किराए का आकलन बाजार दर पर नहीं किया है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को आवास किराए का आकलन बाजार मूल्य के आधार पर करने और रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करने का आदेश दिया है।