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अब जंगलों तक सीमित नहीं रहेगा वन निगम, बढ़ाएगा रोजगार

Wed, 20 Jul 2016 09:02 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड वन निगम अब सिर्फ जंगलों से लकड़ियां काट कर डिपो से बेचने भर तक सीमित नहीं रहेगा। नया ढांचा पुनर्गठन के बाद निगम औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां शुरू करेगा।
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इससे वन निगम में लोगों को रोजगार मिलने और नौकरियां पाने के अवसर विकसित होंगे। वन निगम प्रदेश की कमाई का जरिया बनेगा। यहां फर्नीचर, बांसों की ज्वैलरी समेत अन्य उत्पादों की फैक्ट्रियां खोली जा सकती हैं।

उत्तराखंड वन विकास निगम का पहला ढांचा वर्ष 2007 में तैयार किया गया। इसमें वन निगम को टिंबर कारोबार तक फोकस कर दिया गया। निगम जंगलों से लकड़ियां कटवा कर लाता और इन्हें अपने डिपो के माध्यम से बेचता रहा।
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फर्नीचर बनाने वाली कंपनियां यहां लकड़ियां खरीदती रहीं। इसके बाद राज्य सरकारों ने इसे खनन का काम दे दिया। निगम में शुरू से ही स्टाफ की कमी रही। मुख्यमंत्री हरीश रावत के निर्देश पर प्रदेश शासन ने वन निगम के कार्यों में विविधता लाने के लिए इसका ढांचा पुनर्गठित किया है। इससे निगम में उद्यमों का क्लस्टर विकसित होगा।

नए ढांचे के लागू होने के बाद निगम में कम से कम 20 हजार अफसरों और कर्मचारियों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसके अलावा तकनीकी विशेषज्ञों को नौकरियां मिलेंगी। वन निगम को इको टूरिज्म, राफ्टिंग, बीच कैंप आदि का कार्य भी दे दिया गया है।

प्रदेश में बीच कैंपिंग अब वन निगम ही कराएगा। यह कार्य निजी कंपनियों को नहीं दिया जाएगा। इस संबंध में शासनादेश हो गया है। वन निगम के प्रबंध निदेशक एसटीएस लेप्चा का कहना है कि वन निगम के कार्यों में विविधता रहेगी। बहुत सी चीजों का कच्चा माल वन निगम दूसरे प्रांतों को बेचता है। अगर तकनीकी स्टाफ रहेगा तो निगम किसी से एमओयू (मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिंग) करके खुद कारखाने लगवा सकता है।
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यह उद्यम लगा सकता है वन निगम
- बांसों के आभूषण
- काष्ठ से संबंधित सामान
- घास से संबंधित उत्पाद
- फर्नीचर का कारोबार
- जड़ी-बूटियों से दवा बनाने का काम
- राफ्टिंग, बीच कैंपिंग कराने का काम
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