कद करीब साढ़े पांच फीट.. लेकिन खेल ऐसा कि विरोधी खिलाड़ियों को नचा दे। प्रोफेशनल फुटबाल क्लब का सपना देखने वाले उत्तराखंड पुलिस की फुटबाल टीम की जान सौरभ रावत संतोष ट्रॉफी के मुख्य ड्रॉ में उत्तराखंड को पहुंचाकर हीरो बन गए हैं।
विपक्षी टीम की धड़कनें बढ़ा दी
क्वालीफायर दौर में तीन मुकाबलों में सौरभ ने 3 गोल दागकर खुद को साबित किया। फुटबाल के मैदान में अमूमन शांत रहने वाले सौरभ के पास जब भी गेंद आई उसने विपक्षी टीम की धड़कनें बढ़ा दी। क्वालीफायर राउंड में उत्तराखंड ने तीन मैच में कुल 5 गोल दागे, इसमें सौरभ के तीन गोल रहे।
हरिद्वार में तैनात उत्तराखंड पुलिस की फुटबाल टीम के लेफ्ट हाफ खिलाड़ी सौरभ के खेल की शुरुआत सात साल की उम्र में हुई। मूलत: पौड़ी निवासी सौरभ ने कंडोलिया मैदान पर पहले कोच जगमोहन सिंह नेगी के निर्देशन में खेल की बारीकियां सीखीं।
सौरभ ने कोचिंग ली
1998 में 10 साल की उम्र में काशीपुर हॉस्टल के लिए ट्रायल दिया और दो साल कोचिंग के बाद स्पोर्ट्स कालेज में भर्ती हो गए। यहां कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य डा. सोबन सिंह नेगी से सौरभ ने कोचिंग ली। इस दौरान कई राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सौरभ ने अपने जलवे बिखेरे।
वर्ष 2008 में सौरभ उत्तराखंड पुलिस में भर्ती हुए और फुटबाल टीम के अहम सदस्य बन गए। जिला लीग हो या फिर राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं सौरभ ने अपने खेल से सभी का दिल जीत लिया। पुलिस टीम के सौरभ के साथी बताते हैं कि वह बहुत शांत रहने वाला इंसान है।