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उत्तराखंड : लोकगीतों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले लोक गायक हीरा सिंह राणा का दिल्ली मेंं निधन

Sat, 13 Jun 2020 06:12 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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लोक गायक हीरा सिंह राणा - फोटो : File Photo
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कुमाऊंनी लोकगीतों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले लोक गायक हीरा सिंह राणा का दिल्ली मेंं निधन हो गया। उनके निधन पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व लोक कलाकारों ने दुख जताया है। गढ़वाली- कुमाऊंनी,- जौनसारी भाषा अकादमी दिल्ली के पहले उपाध्यक्ष लोकगायक हीरा सिंह राणा का देर रात दिल्ली स्थित आवास पर दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

16 सितंबर 1942 को अल्मोड़ा मनीला के डढोली गांव में जन्मे हीरा सिंह राणा का परिवार दिल्ली में रह रहा है। वह अपने पीछे पत्नी विमला और पुत्र हिमांशु को छोड़ गए हैं। उनका अंतिम संस्कार निगमबोध घाट पर किया गया। फरवरी 2020 में भारत सरकार संगीत नाटक अकादमी ने उन्हें अकादमी सलाहकार नियुक्त किया था।

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उन्होंने उत्तराखंडी संस्कृति को रंगीली बिंदी, रंगदार मुखड़ी’, ‘आहा रे ज़माना’ आदि लोकगीतों के जरिए नई पहचान दिलाई। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तराखंड के महान लोक गायक व लोक संगीत के पुरोधा हीरा सिंह राणा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हीरा सिंह राणा के निधन से लोकसंगीत को अपूर्णीय क्षति हुई है।

हीरा दा, अपने गीतों में आप हमारे बीच अमर रहोगे  

राज्य आंदोलन की भावनाओं को अपने गीतों में पिरोने वाले लोकगायक हीरा सिंह राणा के निधन पर कांग्रेस नेताओं ने शोक जताया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा-हीरा दा, अपने गीतों में आप हमारे बीच अमर रहोगे। 

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नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने कहा कि हीरा सिंह राणा ने लोकगायकी को नया आयाम दिया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि वे पहाड़ के सरोकार से हमेशा जुड़े रहे। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि उनके निधन से रिक्त हुए स्थान की पूर्ति अब नहीं हो पाएगी। कांग्रेस संगठन महामंत्री विजय सारस्वत, कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप आदि ने कहा कि उनके गीतों में पर्वतीय लोक महका करता है।

कौन कहेगा अब मुझसे - हिम्मत का सांथा

कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी लोकगायक हीरासिंह राणा को श्रद्धांजलि अर्पित की। हरीश रावत ने कहा - मैं आज भी गुनगुनाता हूं, आगे भी गुनगुनाउंगा- लस्के कमर बांधा, हिम्मत का सांथा। गोपाल बाबू गोस्वामी के बाद कुमाऊंनी और उत्तराखंडी गीतों को नई बुलंदी देने वाला, मानेली की डाली का हिरदा अब हमारे बीच नहीं है।  

कमी हमेशा खलेगी

गढ़वाली, कुमाऊंनी, जोनसारी भाषा अकादमी के सदस्य पवन मैठाणी ने कहा कि अकादमी के उपाध्यक्ष रहे हीरा सिंह राणा के साथ काम करने का अवसर मिला। विवाद रहित और शांत स्वभाव के हीरा सिंह राणा की कमी हमेशा खलेगी।

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