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घर तो छोड़ दिए, लेकिन नहीं छूटा मोह

Thu, 25 Jul 2013 11:09 AM IST
लखपत रावत/दीपक बेंजवाल
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खतरे की जद में खड़े आशियानों के प्रति अभी भी लोगों का प्यार कम नहीं हुआ है। अगस्त्यमुनि, विजयनगर, जवाहरनगर, गंगानगर और सिल्ली आदि स्थानों पर लोग हर शाम को अपने खाली किए घरों में दीया जलाकर भगवान से इन सूने पड़े घरों में चहल-पहल लौटाने की प्रार्थना कर रहे हैं।
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कई आवासीय भवन मंदाकिनी में समा गए
अगस्त्यमुनि क्षेत्रांतर्गत 15/16 जून को मंदाकिनी नदी के उफान पर आने से कई आवासीय भवन मंदाकिनी में समा गए थे। जबकि कई भवन खतरे की जद में आ गाए। परिवार की सुरक्षा को देखते हुए लोगों ने इन घरों को खाली कर अन्यत्र शरण तो ले ली है, लेकिन हर दिन ये लोग अपने आशियाने को निहार रहे हैं।

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अपने घरों के प्रति प्यार ही है, जिसके कारण हर शाम को ये लोग घर में उजाला करने के लिए वहां दीया जला रहे हैं।

प्रभावित सरला देवी सेमवाल, कैलाश राणा ने बताया कि बड़ी उम्मीदों के साथ अपना घर बनाया है। जब तक ये बचे हैं, इनमें अंधेरा कैसे होने दें। ये ईंट-बजरी के नहीं बल्कि हमारी भावनाओं को अपने में समेटे हुए हैं। इन घरों में हमारी कितनी यादें हैं।
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केस-1 : जवाहरनगर (अगस्त्यमुनि) निवासी बलवीर सिंह नेगी का घर खतरे की जद में है। परिवार की सुरक्षा के लिए उन्होंने घर खाली करके बनियाड़ी में किराए पर कमरा ले लिया है। लेकिन हर शाम को घर में उजाला करने के लिए वह वहां दीया जलाकर आते हैं। उम्मीद है कि जल्द खतरा टल जाएगा और सूने पड़े उनके घर में चहल-पहल लौट आएगी।

केस-2 : जवाहरनगर (अगस्त्यमुनि) निवासी महिधर प्रसाद भट्ट का मकान भी नदी के उफान के कारण खतरे में है, जिस कारण उन्होंने उसे खाली कर दिया है। लेकिन मन में अभी भी अपने घर के प्रति प्यार है। तभी तो हर रोज शाम को घर में दीया जलाकर घर के सूनेपन को उजाले से दूर कर रहे हैं।
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