प्रदेश में जल प्रलय के बाद बंद हुए प्रभावित क्षेत्रों को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग अब तक नहीं खुल पाए हैं। यह हाल तब है जबकि राहत शुरू हुए डेढ़ माह बीत चुके हैं। सड़कों की हालत न सुधरने से कटे हुए क्षेत्रों में राहत सामग्री भी नहीं पहुंच पा रही है। अब तक राजमार्गों की स्थिति ही नहीं सुधर पाई है, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि संपर्क मार्गों की हालत कैसी होगी।
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उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और पिथौरागढ़ में सड़कों की स्थिति खस्ताहाल है। बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) और पीडब्लूडी (लोक निर्माण विभाग) की सड़कों को वाहनों के लिए खोलने की योजना बेहद धीमी रफ्तार से चल रही है। खराब मौसम के चलते जहां एक ओर पुनर्निर्माण नहीं हो पा रहा है, वहीं सड़कों से मलबा हटाने में भी निर्माण एजेंसियों की कोशिशों पर बारिश भारी पड़ रही है।
ऋषिकेश-धरासू-उत्तरकाशी-गंगोत्री राजमार्ग केवल उत्तरकाशी तक ही पूरी तरह से खुला है। उत्तरकाशी से आगे सड़क पर सात से आठ जगहों पर भूस्खलन और कटाव के चलते सड़क मार्ग केवल पैदल यात्रा के लिए ही खोला जा सका है। ऋषिकेश-जोशीमठ-बदरीनाथ-माणा राजमार्ग पर भी लगभग 500 किलोमीटर का रास्ता खुला है। गोविंदघाट व पांडुकेश्वर पर पुल निर्माण को अभी लंबा समय लगेगा, जिससे बदरीनाथ-माणा-मलेरी राजमार्ग अभी सड़क मार्ग से अछूते हैं।
रुद्रप्रयाग और गौरीकुंड मार्ग के बीच कई किलोमीटर लंबी सड़क बहने से उसे खोल पाना आसान नहीं है, हालांकि टिहरी से वैकल्पिक मार्ग का समाधान जरूर है। पिथौरागढ़ जनपद में टनकपुर-पिथौरागढ़-तवाघाट मार्ग भी धारचूला के पास अभी क्षतिग्रस्त है, जबकि उसके आगे तवाघाट तक चार जगह पर सड़क कटने से मार्ग खुल नहीं पाया है। यही हाल मुनस्यारी मार्ग का भी है।
हवाई मार्ग से भी राहत नहीं
आपदा के बाद से अब तक तीन हेलीकाप्टर क्रैश होने और कुछ इमरजेंसी लैंडिंग के बाद हवाई उड़ानें सीमित कर दी गईं हैं। वायुसेना के हेलीकाप्टरों की सेवाएं केवल केदारनाथ के लिए हैं, जबकि अन्य सिविल हेलीकाप्टर भी खराब मौसम में हादसों की आशंका के चलते उड़ान नहीं भर रहे हैं। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री के साथ ही डाक्टरों और अधिकारियों का जाना सीमित हो गया है।
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