प्रदेश की पहली पैनिक बटन वाली बस अप्रैल से दून की सड़कों पर चलती दिखाई देगी। बीते नौ सितंबर को देहरादून से मसूरी के बीच इलेक्ट्रिक बस का एक महीने का ट्रॉयल सफल रहा था। जिसके बाद परिवहन निगम ने गढ़वाल और कुमाऊं में 25-25 बसें चलाने का निर्णय लिया था। पहले यह बसें जनवरी में चलाई जानी थी, लेकिन अब अप्रैल में इस सेवा की शुरुआत होगी।
बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए परिवहन निगम ने प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसें चलाने का निर्णय लिया था। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बीते नौ सितंबर को देहरादून से मसूरी के बीच इलेक्ट्रिक बस को ट्रायल के लिए रवाना किया था। एक महीने का ट्रायल सफल रहा। इसी तरह हल्द्वानी से नैनीताल के बीच किया गया ट्रायल भी सफल रहा था। दिसंबर में इलेक्ट्रिक बस के लिए ट्रॉयल होना था लेकिन अभी तक टेंडर नहीं हो पाए हैं। टेंडर प्रक्रिया के बाद अप्रैल में इलेक्ट्रिक बसें चलने की संभावना है। पहले चरण में दून से मसूरी और हल्द्वानी से नैनीताल मार्ग पर 25-25 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएगी। इसके बाद इनकी संख्या में इजाफा किया जाएगा।
इलेक्ट्रिक बस से होगी तीन गुनी बचत
इलेक्ट्रिक बस में प्रति किलोमीटर एक यूनिट से भी कम खर्च आ रहा है। साधारण बस में जहां 18 रुपये प्रति किलोमीटर खर्च आता है। वहीं, इलेक्ट्रिक बस में महज छह रुपये प्रति किलोमीटर बिजली खर्च हो रही है। साधारण बस भले ही 25 लाख रुपये में आती हो, लेकिन उस पर आने वाला खर्च काफी है। वहीं, इसकी तुलना में इलेक्ट्रिक बस की कीमत एक करोड़ रुपये है, लेकिन इसमें कई हाईटेक सुविधाएं हैं। पर्यावरण दूषित नहीं होता है। साधारण बस में वारंटी पांच वर्ष होती है। जबकि इलेक्ट्रिक बस में यह 15 साल बताई जा रही है। इलेक्ट्रिक बस एक बार चार्ज होने के बाद बस 200 से 250 किलोमीटर का सफर तय करेगी।
ऐसे समझें दोनों बसों मेें अंतर
इलेक्ट्रिक बस साधारण बस
व्हीलबेस 9 मीटर 8.5 मीटर
सीट 30 35
टैंक - 160 लीटर
एवरेज 6 रुपये प्रति किमी 18 रुपये प्रति किमी
वारंटी 15 साल 6 साल
कीमत एक करोड़ रुपये 25 लाख रुपये
अधिकतम रफ्तार 80 किमी प्रतिघंटा 80 किमी प्रतिघंटा
मेंटीनेंस दो रुपये प्रति किमी पांच रुपये प्रति किमी
टेंडर प्रक्रिया में देरी के चलते अब इलेक्ट्रिक बसें अप्रैल में चलने की संभावना है। इससे ईको फ्रेंडली होने के चलते इन बसों से वायु प्रदूषण कम फैलेगा।
- दीपक जैन, महाप्रबंधक संचालन