वन रक्षक से लेकर रेंजर तक के वन विभाग के करीब दस हजार अधिकारी/ कर्मचारी अब एक मंच पर आकर अपनी मांगों के लिए संघर्ष करेंगे। दो साल पूर्व गठित हुए वन फील्ड कर्मचारी/अधिकारी महासंघ की सोमवार को हुई बैठक में महासंघ की मान्यता लेने का फैसला किया गया।
इस महासंघ में वन रक्षकों, उप वन क्षेत्राधिकारी, वन क्षेत्राधिकारी और वन दरोगा के मान्यता प्राप्त संगठन शामिल हैं। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप पंवार के मुताबिक महासंघ की मान्यता होते ही चारों संवर्गों के लिए पुलिस के समान एक माह का अतिरिक्त वेतन और अन्य मांगों को लेकर लड़ाई लड़ी जाएगी।
वन विभाग में वन रक्षकोें से लेकर वन दरोगा तक के पद फील्ड के पद माने जाते हैं। महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि फील्ड कर्मचारियों की अपनी अलग समस्याएं हैं। इनको जंगलों में वन्य जीवों के साथ ही तस्करों से मुकाबला करना होता है। इस जोखिम की भरपाई के साथ ही पदोन्नति सहित अन्य मांग मान्यता प्राप्त संगठन करते रहे हैं।
अब चारों मान्यता प्राप्त संगठनों ने महासंघ के बैनर तले लड़ाई लड़ना तय किया है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप पंवार के मुताबिक महासंघ को दो साल पहले गठित किया गया था और इस बीच कई बैठकें भी हुईं। अब चारों संगठनों ने महासंघ के बैनर के तहत काम करना स्वीकार कर लिया है। शासन को जल्द ही इसका प्रस्ताव भेज दिया जाएगा। तय किया गया है कि महासंघ की अगली बैठक फरवरी में होगी।
बैठक में ये हुए शामिल
गणेश त्रिपाठी, अध्यक्ष वन क्षेत्राधिकारी संघ, महामंत्री मयंक गर्ग, नवीन कुमार अध्यक्ष और प्रमोद ध्यानी महामंत्री डिप्टी रेंजर संघ, इंद्रमोहन कोठारी अध्यक्ष सहायक वन कर्मचारी संघ, आशीष कोठारी अध्यक्ष वन रक्षक संघ सहित संगठनों के अन्य पदाधिकारी।