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अमर उजाला एक्सक्लूसिव: उत्तराखंड में बंजर भूमि पर सगंध खेती से महकी किसानों की जिंदगी

Thu, 29 Oct 2020 12:05 PM IST
अलका त्यागी भूपेंद्र राणा, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • 72 करोड़ पहुंचा प्रदेश में एरोमा क्षेत्र का कारोबार 
  • 12 तरह के सुगंधित तेलों का व्यावसायिक स्तर पर हो रहा उत्पादन
  • प्रदेश में सगंध फसलों की क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा दे रही सरकार 
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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बंजर भूमि से मुनाफा कमाने के लिए किसानों के हाथ सगंध खेती की तरफ बढ़ रहे हैं। प्रदेश के हजारों किसानों ने क्लस्टर आधारित सगंध फसलों की खेती को अपनाया है। जिससे राज्य में एरोमा क्षेत्र का सालाना कारोबार 72 करोड़ पहुंच गया है। पहली बार प्रदेश में सगंध पौधों से 12 तरह के सुगंधित तेलों का व्यावसायिक उत्पादन किया जा रहा है। इन तेलों को परफ्यूमरी उद्योगों को उपलब्ध कराया जा रहा है। 

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प्रदेश में खेती को मुनाफे में लाने के लिए सरकार का क्लस्टर आधारित सगंध फसलों की खेती को बढ़ावा देने पर जोर है। पहाड़ों में खाली पड़ी बंजर भूमि पर सगंध पौधों की खेती कर किसान ज्यादा आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। किसानों के उत्पादित तेल की मार्केटिंग के लिए सरकार ने इंतजाम किया है। वहीं, 22 प्रकार के सुगंधित तेलों का सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है। उत्तराखंड सगंध फसलों से निकलने वाले इन तेलों की एमएसपी निर्धारित करने वाला देश का पहला राज्य है। 

प्रदेश में अब तक 21 हजार से अधिक किसानों ने 7600 हेक्टेयर बंजर भूमि पर सगंध फसलों की खेती अपनाई है। एरोमा खेती से जहां किसानों को जंगली जानवरों व बंदरों की समस्या से निजात मिली है। वहीं, पारंपरिक फसलों से ज्यादा आय हो रही है। सगंध पौध केंद्र (कैप) के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण देकर क्लस्टर खेती के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है। 

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प्रदेश में उत्पादित सगंध तेलों को मिलेगी पहचान

राज्य में उत्पादित सगंध तेलों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कैप में एरोमा प्रोसेसिंग सेंटर व परफ्यूमरी प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। इससे किसानों को विभिन्न प्रकार के सगंध फसलों से तेल निकालने के लिए आसवन सुविधा भी उपलब्ध होगी। वहीं, सगंध तेल आधारित नए उत्पादों को तैयार किया जा सकेगा। 

सगंध फसल      क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)        किसान         उत्पादन 
लेमनग्रास               700                         3800          576 क्विंटल तेल
मेंथा                      6000                         5500         5755 क्विंटल तेल
कैमोमिल               181                           1551         905 क्विंटल फूल
तेज पात                 365                           6201        9120 क्विंटल पत्तियां
डेमस्क गुलाब           73                            1250        276 क्विंटल गुलाब जल


राज्य में सगंध फसलों की खेती में अपार संभावनाएं हैं। किसान बंजर भूमि पर इसकी खेती कर ज्यादा आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। अब किसान एरोमा की क्लस्टर खेती करने के लिए आगे आ रहे हैं। पहले जहां प्रदेश में एरोमा सेक्टर का सालाना टर्न ओवर एक करोड़ था। वहीं, अब 72 करोड़ सालाना पहुंच गया है।
- नृपेंद्र चौहान, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सगंध पौध केंद्र
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