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बढ़े निवेश तो सुधरे अन्नदाता की माली हालत

Sat, 27 Feb 2016 11:36 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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केंद्र के सालाना बजट में जहां आमजन के अलावा उद्योगपतियों और अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोगों को कई उम्मीदें हैं, वहीं उत्तराखंड के अन्नदाताओं को भी केंद्र व राज्य सरकार से बजट में कई उम्मीदें है।
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किसानों को उम्मीद है कि नए सालाना बजट में उन्हें कृषि बीजों, उपकरणों में ज्यादा अनुदान के साथ ही सरकारों की ओर से कई नई कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की जा सकती है।

नाबार्ड के आंकड़ों पर नजर डाले तो उत्तराखंड में 8,91,000 किसान कुल 8,43,000 हेक्टेयर जमीन पर खेतीबाड़ी करते हैं। इन किसानों में 70.48 प्रतिशत सीमांत किसान, 17.85 प्रतिशत छोटे किसान, 11.56 प्रतिशत मध्य किसान और महज 0.11 फीसदी बड़े किसान शामिल है।
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राज्य के कुल सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में किसानों का योगदान 10.65 फीसदी है जबकि राज्य की 58 फीसदी जनसंख्या खेतीबाड़ी पर निर्भर है।

किसानों की स्थिति सुधारने को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार की ओर से आरकेवीवाई, नेशनल मिशन फार एग्रीकल्चर एक्सटेंशन एंड टेक्नोलॉजी, राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना, किसान पेंशन, सरकार किसान के द्वार, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, नेशनल मिशन फार सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (एनएमएसए) जैसी दर्जन भर कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है।
इतना सब भी अन्नदाता की स्थिति को सुधार नहीं पाया है।

मैदानी इलाकों में तो स्थिति फिर भी ठीक है, लेकिन पहाड़ के किसान खेतीबाड़ी से मुंह मोड़ रहे हैं। यह स्थिति तब है जबकि पर्वतीय इलाकों में आर्गेनिक खेती की अपार संभावनाएं हैं। केंद्र और राज्य सरकार के नए बजट में किसानों को कई योजनाओं की घोषणा के साथ ही अधिक से अधिक निवेश का इंतजार है।

बीजों, यंत्रों पर अधिकतम अनुदान की दरकार
केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कृषि बीजों व उपकरणों पर अनुदान दिया जा रहा है, लेकिन किसानों का मानना है कि यदि सरकार अनुदान राशि और अधिक बढ़ाए तो इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में और अधिक सुधार होगा, जिसका सीधा कृषि उत्पादन पर भी पढ़ेगा।

विपणन तंत्र के विकास पर हो जोर
राज्य में मंडी परिषद, सहकारी समितियों के जरिए कृषि उत्पादों की खरीद की जा रही है। इतना सब होने के बावजूद अब भी किसानों को अपने उत्पादों को बेचने में दिक्कत आ रही है। कृषि उत्पादों के विपणन के मद्देनजर राज्य के विभिन्न इलाकों में और अधिक मंडी समितियों को खोलने की जरूरत है।

पर्वतीय इलाकों में कृषि के छोटे यंत्रों की उपलब्धता के साथ ही किसानों को खेतीबाड़ी के प्रति जागरूक करना होगा। केंद्र और राज्य दोनों को कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना होगा।
- डॉ. सुनील पांडे, विशेषज्ञ, नाबार्ड

फ्लोरीकल्चर और आर्गेनिक खेती पर जोर देना होगा। केंद्र और राज्य सरकार के सालाना बजट में कृषि का बजट बढ़ाना होगा। सरकारें किसानों को अधिकतम कृषि अनुदान दें।
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- ज्ञानेंद्र सिंह, प्रगतिशील किसान
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