उत्तराखंड में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। राज्य के बड़े सरकारी अस्पतालों में फिजिशियन, सर्जरी, महिला, बालरोग सहित कई विशेषज्ञ चिकित्सकों के लगभग आधे पद खाली हैं। इसके चलते मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा है।
फिजिशियन के 182 पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल 52 चिकित्सक कार्यरत हैं और 130 पद खाली हैं। सर्जन के 144 पदों में 74 कार्यरत और 70 रिक्त हैं। एनस्थीशिया के 181 पदों में 87 पर चिकित्सक कार्यरत हैं, जबकि 94 पद खाली हैं। वहीं, बालरोग विशेषज्ञों के 160 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 75 चिकित्सक कार्यरत और 85 पद रिक्त हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञों के 175 पदों में केवल 73 चिकित्सक कार्यरत हैं, जबकि 102 पद खाली पड़े हैं। इसी तरह मनोचिकित्सकों के 29 पद सृजित हैं, लेकिन केवल नौ चिकित्सक कार्यरत हैं और 20 पद रिक्त हैं। बढ़ती मनोवैज्ञानिक समस्याओं के बीच विशेषज्ञों की यह कमी मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
फॉरेंसिक के 25 में 23 पद खाली
फॉरेंसिक एक्सपर्ट चिकित्सकों के 25 पदों में केवल दो कार्यरत हैं और 23 रिक्त हैं। चर्मरोग विशेषज्ञों के 35 पदों में 28 खाली हैं। माइक्रोलोजी विशेषज्ञों के 10 पद और पब्लिक हेल्थ विशेषज्ञों के 97 स्वीकृत पदों में 67 पद रिक्त हैं।
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सरकार विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए कई उपाय कर रही है। चिकित्सकों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाकर और पीजी डॉक्टरों के लिए दो साल का सेवा बांड भरवाकर हम विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं। हम जल्द ही सभी अहम विभागों में योग्य चिकित्सकों की कमी पूरी करने में सफल होंगे। - डॉ. सुनीता टम्टा, स्वास्थ्य महानिदेशक