औद्योगिक नीति में नए संशोधन करने की तैयारी
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उत्तराखंड सरकार औद्योगिक नीति में नए संशोधन करने की तैयारी में है। नए संशोधन में वह सर्विस सेक्टर से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहित करेगी। इसकी वजह वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को माना जा रहा है।
प्रदेश में जीएसटी लागू होने के बाद जनवरी माह तक प्रदेश सरकार को करीब 8536 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जिसमें से 5848 करोड़ रुपये आईजीएसटी के रूप में राज्य से बाहर चले गए। माना जा रहा है कि राजस्व की यह बड़ी राशि प्रदेश में स्थापित उद्योगों से प्राप्त हुई है, जिसका फायदा कन्ज्यूमर स्टेट का हुआ है।
प्रदेश सरकार ने ऐसी करीब 226 उत्पादक इकाइयां चिह्नित की हैं। जीएसटी के प्रावधानों के मुताबिक, ये उद्योग उत्पादन बेशक उत्तराखंड में कर रहे हैं, लेकिन इनसे वसूले जा रहे जीएसटी का फायदा उत्पादों की खपत करने वाले राज्यों को हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी लागू होने से पूर्व ऐसे उद्योगों से मूल्य वर्धित कर (वैट) के एवज में प्रदेश सरकार को पूरा राजस्व प्राप्त हो रहा था। इस घाटे की भरपाई केंद्र सरकार कर रही है। लेकिन पांच साल के बाद इसकी भरपाई राज्य सरकार को वहन करनी है।
यदि उसने अभी प्रयास नहीं किए तो भविष्य में उसे जीएसटी का बढ़ा घाटा झेलना पड़ सकता है। यही वजह है कि संभावित घाटे की भरपाई के विकल्पों पर अभी से विचार करना पड़ रहा है। इसके लिए प्रदेश सरकार अब औद्योगिक नीति में कुछ ऐसे प्रावधान करने जा रही है, जिसमें सर्विस सेक्टर से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि जीएसटी से प्राप्त होने वाले राजस्व को बाहर जाने से रोका जा सके।