ये गड़बड़ियां आईं सामने
- जिन आमंत्रित टेंडर का भौतिक निरीक्षण किया गया, उनमें से अधिकांश निर्माण या मरम्मत के काम पूर्व में ही ठेकेदारों ने पूरे कर दिए या काम शुरू कर दिया। जबकि टेंडर किसी भी निविदाकर्ता के पक्ष में नहीं खोला गया। इससे निविदा दाताओं में मिलीभगत प्रतीत हुई।
- निविदा दाताओं के आगणन में भी गलतियां की गईं। जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की चेष्टा प्रतीत हुई, संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है।
- एमडीडीए की एनओसी लिए बिना ही कुछ कार्यों के टेंडर जारी कर दिए गए।
- नगर पालिका मसूरी ने 25 कोटेशन में से 24 के ही निर्माण, मरम्मत की अनुमति ली। सभी काम बिना वर्क ऑर्डर करा लिए गए।
- नगर पालिका मसूरी ने करीब 5 करोड़ 70 लाख के टेंडर निकाले। इस पर होने वाली खर्च व कमाई के बारे में जानकारी मांगी तो संयुक्त समिति को गलत तथ्य पेश किए गए।
मसूरी की रिपोर्ट मिल चुकी है। हमने शहरी विकास निदेशालय से इस पर विस्तृत जानकारी मांगी है। जानकारी आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- आरके सुधांशु, प्रमुख सचिव, शहरी विकास