हरियाणा के तराई क्षेत्र में सर्वे करती शोध छात्रों की टीम
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दक्षिण की ओर खिसक रहा विरूपण क्षेत्र
शोधार्थी हर्ष कुमार ने बताया कि पहले हुए शोधों में यह बात सामने आ चुकी है कि हिमालय का विरूपण क्षेत्र धीरे-धीरे दक्षिण की ओर खिसक रहा है। इसकी वजह है कि इंडियन प्लेट के यूरेशियन प्लेट से टकराने से लगातार घर्षण हो रहा है। इसीलिए इंडियन प्लेट हर साल पांच सेंटीमीटर प्रतिवर्ष की दर से यूरेशियन प्लेट के नीचे धंस रही है। हिमालय पर्वत शृंखला का निर्माण भारतीय महाद्वीप प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच टकराव के परिणामस्वरूप हुआ है। हमारे शोध में सामने आया है कि सक्रिय विरूपण हिमालय के अग्रभाग में सिंधु-गंगा के जलोढ़ मैदानों के 10-25 किमी चौड़े पीडमोंट क्षेत्र तक फैल रही है।
जीपीआर तकनीक का उपयोग कर किया गया शोध
शोध छात्र हर्ष कुमार ने बताया कि हमने उपग्रह डेटा का उपयोग करके सक्रिय टेक्टॉनिक विरूपण की भू-आकृति विज्ञान का दस्तावेजीकरण करने के लिए हरियाणा के उत्तर-पश्चिम हिमालय के अग्रवर्ती भागों में घग्गर और यमुना नदी घाटियों के बीच पीडमोंट क्षेत्र की जांच की। जियोफिजिकल ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) सर्वेक्षणों में इसकी पुष्टि हुई। जीपीआर एक महत्वपूर्ण उपकरण है जो जमीन के भीतर कुछ मीटर से लेकर सैकड़ों मीटर की गहराई तक उप सतह के हाई रिजोल्यूशन ग्राफिक चित्र उपलब्ध कराता है। यह इस शोध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अलावा नदियों के प्रवाह पैटर्न में अस्थायी परिवर्तनों का पता लगाने और मानचित्रण करने के लिए विभिन्न ऑप्टिकल उपग्रह चित्रों का उपयोग किया गया।