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राफेल मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भी किया गुमराह: हरीश रावत

Sun, 16 Dec 2018 08:47 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
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harish rawat
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कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा है कि राफेल मामले में मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष गलत तथ्य और दस्तावेज प्रस्तुत करने की दोषी है।

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कोर्ट ने जिन दस्तावेजों को निर्णय का आधार बनाया वह पूरी तरह काल्पनिक और गढ़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि न्यायालय में पेश की गई सीएजी रिपोर्ट को न तो संसद में रखा गया और न ही पब्लिक अकाउंट कमेटी (पीएसी) के सामने। ऐसा कर मोदी सरकार ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए कैग को गहरे राष्ट्रीय संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया है।

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि आखिर कैग अपनी रिपोर्ट को सीधे कोर्ट के समक्ष रखने के लिए क्यों मजबूर हुई। जनता को यह जानने का हक है कि 526 करोड़ का राफेल आखिरकार 1670 करोड़ का क्यों खरीदा गया?

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क्षैतिज आरक्षण को खत्म कर रद्दी की टोकरी में डाल दिया

उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन में सैन्य जरूरतों के हिसाब से 126 राफेल खरीदने की योजना थी, मोदी सरकार में यह संख्या बढ़कर 136 कैसे हो गई। रावत ने कहा कि कैग की यह रिपोर्ट भी मेड इन चाइना अथवा मेड इन फ्रांस है। कांग्रेस शुरू से ही इस मामले में ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (जेपीसी) बैठाने की मांग कर रही है। 

राज्य सरकार को भी आड़े हाथ लेते हुए कहा कि राज्य आंदोलनकारियों को दिए क्षैतिज आरक्षण को खत्म कर रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया है। अभी तक न तो गन्ना क्रय केंद्र खोले हैं और न ही समर्थन मूल्य घोषित किया है।

यदि जल्द गन्ना क्रय केंद्र नहीं खोले गए तो वह एक दिवसीय उपवास पर बैठने को मजबूर होंगे। नए भू कानून से सरकार ने प्रदेश के सीमांत क्षेत्र में भी जमीन की खरीद का रास्ता खोल दिया है जो राज्य के लिए घातक है।
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1200 रिक्त पदों पर आज तक नियुक्तियां नहीं हुई

गैरसैण में कांग्रेस शासन में जितना काम हुआ भाजपा के आने के बाद उससे एक इंच भी अधिक काम नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार ने राज्य के विभिन्न विभागों में 17 हजार पदों को मृत घोषित कर दिया है। 1200 रिक्त पदों पर आज तक नियुक्तियां नहीं हुई हैं।

उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि एनएच 87 में मिले मुआवजे से असंतुष्ट काश्तकार आर्बिटेशन में जाना चाहते हैं लेकिन कई जगह जिलाधिकारी इससे बच रहे हैं। इस दौरान राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व विधायक नारायण पाल, ब्लाक प्रमुख भोला भट्ट आदि मौजूद थे।
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