पौड़ी गढ़वाल स्थित चौंदकोट गढ़ 380 ईसा पूर्व आबाद रहा है। यहां सर्वे में ईसा पूर्व में मानव आवास के प्रमाण मिले हैं। एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय की ओर से पहली बार कार्बन डेटिंग के आधार यह भी साबित हुआ है कि 10वीं शताब्दी से पूर्व चौंदकोट गढ़ का उद्भव हो गया था। हालांकि इस बात के प्रमाण मिलने बाकी हैं कि यहां गढ़ों का स्थापनाकाल क्या रहा होगा।
शोधकर्ता डॉ. नागेंद्र रावत के अनुसार प्राचीन काल में राजा सुरक्षा की दृष्टि से गढ़ों की रचना करते थे। इसकी जिम्मेदारी गढ़पतियों को दी जाती थी। माना जाता है कि राजा अजयपाल ने 52 गढ़ों को जीतकर अपने साम्राज्य की स्थापना की थी। तब से केदारखंड को गढ़वाल कहा जाने लगा। अब तक इतिहास और जनश्रुतियों के आधार पर गढ़ों के बारे में कहानियां गढ़ी जाती रही हैं।
विवि के इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. नागेंद्र रावत ने यहां से मृदभांड, लाख के बने मनके, लाख व कांच की बनी चूड़ियां, मस्कट बॉल (मस्कट बंदूक में प्रयोग होने वाली पत्थर की गेंद) और कोयले के टुकड़े को एकत्रित किए। कार्बन डेटिंग के लिए कोयले के तीन सैंपल लैब में भेजे गए। एक सैंपल 380 ईसा पूर्व का निकला, जबकि दो अन्य 1080 ईसवी व 910 ईसवी के निकले। डॉ. रावत का कहना है कि यदि अन्य गढ़ों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्ययन हो तो गढ़वाल के वास्तविक इतिहास की जानकारी मिल सकेगी, अन्यथा पारंपरिक ज्ञान के आधार पर इतिहास चलता रहेगा।
सबसे बड़ा गढ़ रहा है चौंदकोट गढ़
चौंदकोट गढ़ पौड़ी जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर विकास खंड एकेश्वर के दांथा गांव की सरहद में स्थित है। यहां गढ़ का नामोनिशान मिट चुका है। यहां पाटीसैण-नौगोंखाल-चौबट्टाखाल-दमदेवल मोटर मार्ग से जा सकते हैं। चौंदकोट गढ़ को सबसे बड़ा गढ़ माना जाता है। यह 46.33 हेक्टेयर भूमि में फैला था। इसमें त्रिस्तरीय व्यवस्था- सुरक्षा चौकी, स्थानीय निवासियों के घर और गढ़पति का किला हुआ करता था।