प्रदेश में वन विभाग ने साफ कर दिया है कि सड़क, मकान, दुकान आदि के लिए पेड़ नहीं काटे जाएंगे। इन पेड़ों के ट्रांसलोकेट (जड़, मिट्टी सहित उखाड़कर दूसरी जगह लगाना) पर हर हाल में विचार किया जाएगा। प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने यह आदेश जारी करते हुए वन अधिकारियों से कहा है कि वे इसमें तकनीकी सहयोग दें।
प्रदेश में इस समय ग्रुप हाउसिंग की भी कई परियोजनाएं चल रही हैं। ऐसे में बिल्डर इन पेड़ों को कटवा देते हैं। वन विभाग प्रमुख जयराज की ओर से जारी आदेश के मुताबिक किसी आवासीय योजना आदि के लिए पेड़ों को काटने से पहले पेड़ों को ट्रांसलोकेट किया जाएगा। यह काम बिल्डर करेगा और डीएफओ तथा वन उप निदेशक की देखरेख में यह काम होगा।
शहर में नगर निकाय, सरकारी संस्थाओं की ओर सेे भी पेड़ों का हटाने का आग्रह होता है तो पहले उन पेड़ों को ट्रांसलोकेट करना होगा। बरगद, पीपल, पिलखन, नीम जैसे पेड़ों को काटने से बचा जाएगा और बहुत अधिक जरूरत पड़ी तो पहले इनके ट्रांसलोकेट पर विचार किया जाएगा।
वन विभाग करेगा तकनीकी सहयोग
ट्रांसलोकेट में वन विभाग तकनीकी सहयोग देगा। अगर शहरी क्षेत्र में जमीन उपलब्ध नहीं है तो सबसे निकट की वन भूमि में इन पेड़ों को ट्रांसलोकेट करना होगा।
नगर पालिका, नगर निगम में बनेगी कमेटी
प्रमुख वन संरक्षक का कहना है कि पेड़ों को काटने और उनके ट्रांसलोकेट में पारदर्शिता जरूरी है। जयराज ने इसके लिए डीएफओ या एसडीओ की अध्यक्षता में एक कमेटी के गठन का सुुझाव दिया है। इस कमेटी में गैर सरकारी संगठनों, पर्यावरणविदें को शामिल किया जाएगा।
लोगों को भी पता रहे कि कहां कट रहे हैं पेड़
वन विभाग के अधिकारियों से कहा गया है कि एक सप्ताह से अधिक का समय हो तो पेड़ों को काटने, ट्रांसलोकेट आदि की जानकारी विभागीय वेबसाइट, नोटिस बोर्ड या पब्लिक डोमेन में प्रदर्शित की जाएगी।