ये है मामला
उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000 के बाद नवंबर 2001 में केंद्र सरकार के आदेशानुसार उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड और नवगठित यूपीसीएल के बीच संपत्तियों व देनदारियों का बंटवारा हुआ था। 12 अक्तूबर 2003 को दोनों निगमों के बीच संपत्ति ट्रांसफर स्कीम बनी लेकिन इसे राज्य सरकार की ओर से औपचारिक रूप से अधिसूचित करने में लगभग दो दशक लग गए। यह आठ मार्च 2022 को जाकर गजट में अधिसूचित हुई। यूपीसीएल ने इस ट्रांसफर स्कीम के तहत बची हुई संपत्तियों के आधार पर डेप्रिसिएशन(मूल्यह्रास), इक्विटी पर रिटर्न, वर्किंग कैपिटल पर ब्याज और सबसे बड़ा हिस्सा-सालों के विलंब पर लगने वाली 4,963.65 करोड़ की कैरिंग कॉस्ट जोड़ते हुए कुल 5,900.01 करोड़ के अतिरिक्त एआरआर का दावा किया था।
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आयोग ने किस मद में कितना माना जायज?
मूल्यह्रास : 288.70 करोड़
रीजनेबल रिटर्न : 97.75 करोड़
कार्यशील पूंजी पर ब्याज : 2.88 करोड़
कैरिंग कॉस्ट : शून्य
कुल : 389.33 करोड़(5,900.01 करोड़)