स्थानीय निकायों के चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग अब उच्च न्यायालय पहुंच गया है। आयोग ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर समय से चुनाव कराने की मांग की है। इस मामले को लेकर बुधवार को सुनवाई हो सकती है।
निकायों के सीमा विस्तार के मामले को लेकर सरकार पहले से ही उलझी हुई है। यह मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसकी वजह से निकाय चुनाव पीछे खिसकने की संभावना भी जताई जा रही है। अब राज्य निर्वाचन आयोग ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर सरकार पर समय से चुनाव कराने का दबाव बढ़ा दिया है।
आयोग की ओर से न्यायालय में दाखिल की गई याचिका में कहा गया है कि प्रदेश में 2013 में गठित निकायों की प्रथम बैठक चार मई, 2013 को हुई थी। संविधान के अनुच्छेद 243 के तहत राज्य में तीन मई 2018 तक निकायों का गठन होना जरूरी है।
सर्वोच्च न्यायालय पूर्व में साफ कर चुका है कि यदि राज्य सरकार समय से चुनाव नहीं कराती है तो आयोग न्यायालय की शरण ले सकता है। आयोग की इस याचिका में राज्य में जल्द चुनाव कराने की मांग की गई है।
यह भी कहा गया है कि चुनाव को लेकर आयोग मुख्य सचिव, शहरी विकास सचिव को आधिकारिक पत्र भेज चुका है लेकिन सरकार ने अभी तक चुनाव कार्यक्रम उपलब्ध नहीं कराया है। आयोग का परामर्श भी सरकार ने नहीं माना है। सूत्रों के मुताबिक उच्च न्यायालय ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया है और बुधवार को इस मामले में सुनवाई हो सकती है।