रुपया पैसा, दारू, साड़ी, चले यहां हर दांव
गुजर गए फिर पांच बरस फिर आ गया चुनाव
उड़ने लगीं दावतें, अब जलने लगे अलाव
गुजर गए फिर पांच बरस फिर आ गया चुनाव
बेघर और गरीबों के प्रति उमड़ा करुणा भाव
गुजर गए फिर पांच बरस फिर आ गया चुनाव
हर गरीब की थाली में दिखने लगा पुलाव
गुजर गए फिर पांच बरस फिर आ गया चुनाव
-हिमांशु जोशी, चंपावत
पवित्र देवभूमि बा, शूरवीरों की भूमि बा ।
यहां चारों देवालय बा, हिंद मुकुट हिमालय बा ।
संजीवनी बूटी बा, फूलों की घाटी बा ।
स्वास्थ में ऐम्स बा, उद्योग में भेल बा ।
ओली में खेल बा, अकूत वन संपदा बा ।
विद्युत उत्पादन ज्यादा बा, नेक नियति तो सब कुछ बा ।
-महेंद्र कुमार, हरिद्वार
दल वाले दल बदल कर देंगे
जनता को फिर बेदखल कर देंगे।
दल-दल के कीचड़ में न फंसकर।।
निर्दल के कुनबे मे आ जाओ।
जीतने के बाद सरकार में मंत्री बनूंगा।
मुझ पर तुम एक बार भरोसा तो जताओ।
कुछ चहेतों को बांटूंगा कुछ तुम्हें खिलाऊंगा।
लेकिन जनता के विश्वास को बनाएं रखूंगा।
- राममूर्ति सिलवाल
उत्तरकाशी
भापजा सरकार बा
युवा मंत्री धामी बा।
हो रहा विकास बा।
सड़क बिजली पानी बा ।
ऑल वेदर रोड बा।
सैनिकों का सम्मान बा।
चहूं ओर खुशहाली बा।
- रेखा सिंघल, हरिद्वार