भाजपा से निष्कासित किए गए पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की कांग्रेस में एंट्री से पहले ही केदारनाथ के विधायक मनोज रावत ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विधायक मनोज का कहना है कि हरक सिंह रावत ने भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का मॉडल पेश किया है। डॉ. हरक के कुप्रबंधन के दर्जनों मामले उनके पास हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर वह सामने रखेंगे। दरअसल, भाजपा में रहते डॉ. हरक सिंह रावत तीन विधानसभा सीटों केदारनाथ, लैंसडोन और डोईवाला की डिमांड कर रहे थे। लेकिन इसके बाद उनकी भाजपा से विदाई हो गई।
अब उनके कांग्रेस में आने की अटकलों के बीच इन सीटों पर पहले से तैयारी कर रहे कांग्रेस पार्टी के दावेदारों का बैचेन होना स्वभाविक है। ऐसे में केदारनाथ से कांग्रेस पार्टी के विधायक मनोज रावत ऐसी नौबत आने से पहले ही हमलावर हो गए हैं। अमर उजाला से बातचीत करते हुए मनोज ने कहा कि डॉ. हरक सिंह रावत लोकतंत्र के हत्यारे हैं। उन्हें कांग्रेस पार्टी में लिया ही नहीं जाना चाहिए। उन्होंने भाजपा में मंत्री रहते हुए भ्रष्टाचार ओर कुप्रबंधन का मॉडल पेश किया है। उनका कार्यकाल उनके विभागों में भ्रष्टाचार के लिए जाना जाएगा। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण कर्मकार बोर्ड से लेकर कोटद्वार में फर्जी मेडिकल कॉलेज है। जिसके निर्माण के लिए एक संस्था को बिना अनुमति दो करोड़ रुपये जारी कर दिए गए।
उन्होंने जब यह मुद्दा विधानसभा में उठाया, तब वह पैसे सरकार को वापस करने पड़े। उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ, जब किसी डीपीआर के नाम पर दो करोड़ रुपये घूस के रूप में दिए गए। उन्होंने कहा कि तब से डॉ. हरक को सपने में भी मनोज रावत और केदारनाथ सीट याद आती है। उन्होंने कहा कि उनके पास हरक सिंह रावत से जुड़े ऐसे दर्जनों मामले हैं, जिनका वह वक्त आने पर खुलासा करेंगे।
हरक सिंह की असलियत पहचान चुकी है प्रदेश की जनता
दल-बदल को लेकर आम आदमी पार्टी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर निशाना साधा है। आप का कहना है कि उत्तराखंड में दलबदलू नेताओं ने राज्य आंदोलनकारी शहीदों के सपने तोड़े हैं। ऐसे नेताओं के असली चेहरे को प्रदेश की जनता भलीभांति पहचान चुकी है। भाजपा में रहते हुए हरक सिंह जिनको गाली देते थे आज वे उनके आदरणीय बन गए हैं। सोमवार को प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता में आप प्रवक्ता नवीन पिरशाली ने कहा कि उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर दल बदल से भूचाल आ चुका है। प्रदेश की जनता नेताओं का कुर्सी लोभ देख रही है कि कैसे इन नेताओं का एक सूत्रीय कार्यक्रम है कि किसी भी प्रकार से सत्ता हासिल की जाए।
नेताओं ने दल बदल को अब व्यवसाय समझ लिया हैं। जो कभी कांग्रेस में जाते हैं तो कभी भाजपा में आते हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने कांग्रेस में वापसी के लिए जिस तरह का नाटक रचा है, वह सबके सामने आ चुका है। कांग्रेस और भाजपा ने सिर्फ धोखा देने की राजनीति है। दल बदल करने वाले नेता उत्तराखंड बर्बादी के लिए जिम्मेदार हैं। पिरशाली ने कहा कि दल बदलू नेताओं ने प्रदेश के विकास की कोई चिंता नहीं है। उन्हें सिर्फ अपने परिवार और अपनी कुर्सी की चिंता है।
राज्य गठन के लिए जिन लोगों ने कुर्बानी दी है। आज 21 साल बाद भी उनके सपने पूरे नहीं हुए हैं। उत्तराखंड में जनहित के मुद्दों को लेकर राजनीति नहीं हो रही है। कांग्रेस व भाजपा के नेताओं को अपना हित सर्वोपरि है। प्रदेश की जनता ऐसे नेताओं के असली चेहरे को पहचान चुकी है और इसका जवाब देगी। आप प्रवक्ता ने कहा कि हरक सिंह ने कभी कहा था कि मैं मां धारी की कसम खाता हूं कि चुनाव नहीं लड़ लूंगा। लेकिन आज चुनाव लड़ने के साथ ही अपनी बहू को भी टिकट दिलाने के लिए दलबदल करने से कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं।