फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Uttarakhand Election 2022: कांग्रेस में 30 से अधिक सीटों पर नहीं बन पाई सहमति, सरिता आर्या ने दी चेतावनी, कहा- दूसरे विकल्प खुले

Sat, 15 Jan 2022 06:26 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

सूत्र बताते हैं कि ऐसा रणनीति के तहत किया जा रहा है, ताकि टिकट मिलने के बाद किसी के पाला बदलने से फजीहत न हो।
विज्ञापन
महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

विधानसभा चुनाव के लिए दो दिन कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक के बाद तीसरे दिन भी बैठकों का दौर जारी रहा। देर शाम केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक भी हुई। माना जा रहा है कि करीब 30 सीटों पर अब भी पेच फंसा है। इनमें से 20 सीटें ऐसी हैं, जिनमें पार्टी को ज्यादा माथापच्ची करनी पड़ रही है। इनमें कुछ सीटें ठाकुर-ब्रह्मण तो कुछ सीटें हरीश-प्रीतम खेमे के बीच फंसी हैं। जबकि कुछ सीटें ऐसी भी हैं, जो अंतिम समय में तय की जाएंगी। माना जा रहा है कि इन सीटों को बागियों की वापसी से जोड़कर देखा जा रहा है। 

विज्ञापन


गढ़वाल में इन सीटों पर फंसा है पेच 
उत्तरकाशी जिले की पुरोला सीट पर माना जा रहा था कि भाजपा से कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व विधायक मालचंद का टिकट पक्का है, लेकिन एक दिन पहले उनकी भाजपा नेताओं से हुई मुलाकात के बाद पुन: भाजपा में वापसी की खबरों ने इस सीट पर पेच फंसा दिया है। हालांकि, इसके तुरंत बाद मालचंद का सफाई देता बयान भी सामने आ गया था, जिसमें उन्होंने खुद को कांग्रेस का सच्चा सिपाही बताया है। जिले की दूसरी सीट यमुनोत्री में पिछले चुनाव में पार्टी प्रत्याशी रहे संजय डोभाल और कुछ दिन पहले ही कांग्रेस में शामिल हुए उत्तरकाशी के जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण के बीच टिकट को लेकर टक्कर है। 

टिहरी में किशोर प्रकरण के बाद असमंजस की स्थिति 
टिहरी में किशोर उपाध्याय का टिकट पहले तो पक्का माना जा रहा था, लेकिन अब उन पर कार्रवाई का चाबुक चल चुका है। तमाम पदों की जिम्मेदारी वापस लेेते हुए उन्हें फिलहाल पैदल कर दिया गया है। ऐसे में उनके टिकट को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इधर, कर्णप्रयाग में अनुसूया प्रसाद मैखुरी के निधन के बाद उनकी पत्नी सावित्री देवी ताल ठोक रही हैं तो पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी के पुत्र मनीष खंडूड़ी भी दावेदारी जता रहे हैं। रुद्रप्रयाग में भी कई नामों के बीच घमासान है। नरेंद्रनगर, पौड़ी और लैंसडौन की सीट पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। 
विज्ञापन


देहरादून की दस में से छह सीटों पर घमासान 
टिकटों को लेकर मारामारी सबसे ज्यादा देहरादून में ही है। यहां दस में से छह सीटों पर घमासान है। सहसपुर की अगर बात करें तो यहां तमाम लोग टिकट की लाइन में खड़े हैं। इनमें प्रमुख तौर पर छह से अधिक नाम बताए जा रहे हैं। देहरादून कैंट में छह से अधिक दावेदारों के बीच घमासान है। मसूरी और ऋषिकेश में दो से तीन प्रबल दावेदार हैं। इधर, रायपुर और डोईवाला सीट के बारे में कहा जा रहा है कि यह दोनों सीटें अंतिम समय में तय की जाएंगी। माना जा रहा है पार्टी में कुछ बागियों की वापसी हो सकती है। ऐसे में इन सीटों के पत्ते पार्टी आखिर में खोलेगी। 

हरिद्वार में 11 में से पांच सीटों पर स्थिति स्पष्ट नहीं 
हरिद्वार जिले की 11 में से पांच सीटों पर पार्टी स्थिति स्पष्ट नहीं कर पा रही है। इनमें हरिद्वार शहर, बीएचईएल रानीपुर, रुड़की खानपुर और हरिद्वार ग्रामीण की सीट शामिल है। इनमें से ज्यादातर सीटें पूर्व सीएम हरीश रावत के प्रभाव वाली हैं। बताया जा रहा है कि हरिद्वार की फंसी सीटों का मसला सुलझाने की जिम्मेदारी भी हरीश रावत को ही सौंपी गई है। 

कुमाऊं में इन सीटों पर फंसा है पेच 
कुमाऊं में डीडीहाट सीट का मसला ठाकुर-ब्राह्मण के फेर में फंसा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस सीट पर अंतिम निर्णय लेने के लिए हरीश रावत को अधिकृत किया गया है। इसके अलावा बागेश्वर, सल्ट, सोमेश्वर, भीमताल, कालाठूंगी, काशीपुर, गदरपुर और सितारंगज में भी पार्टी तालमेल बैठाने का प्रयास कर रही है।

विज्ञापन

हरीश रावत के चुनाव लड़ने को लेकर संशय बरकार 

प्रदेश में आचार संहिता लगने और चुनाव की तिथि तय होने के बाद अगर किसी बात की सबसे अधिक चर्चा है तो वह यह है कि हरीश रावत कहां से चुनाव लड़ेंगे। हरीश चुनाव लड़ेंगे भी या नहीं?  इधर, उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने के संकेत दिए है तो आखिरी फैसला कांग्रेस की सेंट्रल इलेक्शन कमेटी (सीईसी) पर भी छोड़ा है। ऐसे में माना जा रहा है कि वह खुद चुनाव प्रचार अभियान की कमान संभालते हुए अपने पुत्र या पुत्री के लिए टिकट मांग सकते हैं। दूसरी तरफ उनके कुमाऊं से डीडीहाट सीट से चुनाव लड़ने की भी चर्चाएं हैं। 

माना जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत कुमाऊं की डीडीहाट सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। हरीश रावत को पिथौरागढ़ से चुनाव मैदान में उतारने का प्रस्ताव कांग्रेस नेताओं की एक बैठक के बाद कांग्रेस हाईकमान को भेजा गया था। यहां से कांग्रेस पिछले 25 वर्षों से चुनाव नहीं जीती है। इस सीट पर पिछले चार विधानसभा चुनाव में भाजपा के बिशन सिंह चुफाल चुनाव जीतते रहे हैं। चुफाल वर्तमान में पेयजल मंत्री हैं और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। हालांकि हरीश रावत की ओर से अभी तक इस बारे में कोई भी बयान सामने नहीं है।

हरीश रावत स्पष्ट शब्दों में अपनी बात कहने के लिए नहीं जाने जाते हैं। लेकिन पिछले दिनों उन्होंने स्पष्ट शब्दों में एक बात जरूर कही, कि वह अपने पुत्र और पुत्री से कहेंगे की वह भी ऐसी सीटों का चयन करें, जहां कांग्रेस लंबे समय से चुनाव नहीं जीती है या पार्टी वहां कमजोर स्थिति में है। उन्होंने कहा कि खुद वह अपने लिए भी यही मापदंड रखते हैं। इसके बाद ही यह चर्चा भी शुरू हो गई कि वह अपने बच्चों को टिकट दिलाना चाहते हैं। हरीश रावत के बेटे आनंद रावत और बेटी अनुपमा रावत कांग्रेस में लंबे समय से सक्रिय हैं। जबकि पार्टी में महिला कांग्रेस की ओर से अनुपमा रावत को हरीद्वार की किसी सीट से उतारे जाने की मांग भी उठ चुकी है। ऐसे में हरीद्वार ग्रामीण वह सीट हो सकती है, जिससे अनुपमा रावत को उतारा जा सकता है। जबकि आनंद रावत को सल्ट से उतारे जाने की बात चल रही है। 

उत्तराखंड में हरीश रावत चुनाव अभियान समिति की बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में उनका पहला लक्ष्य पार्टी को जीत दिलाना हैं। फिलहाल उनके पास कैंपेन करने वाले नेताओं की कमी है। राष्ट्रीय नेताओं की अगर बात करें तो सोनिया गांधी स्वास्थ्य कारणों से रैली इत्यादि से दूर ही हैं। राहुल गांधी के पास उत्तराखंड के अलावा चार अन्य राज्यों की भी जिम्मेदारी है। प्रियंका गांधी के कंधों पर यूपी की जिम्मेदारी हैं। ऐसे में उत्तराखंड में %लोकल कनेक्ट% के नाम पर हरीश रावत ही बड़ा चेहरा हैं।

कांग्रेस को लग सकता है नैनीताल में बड़ा झटका
कांग्रेस पार्टी में पहली सूची जारी होने से पहले ही नैनीताल में पार्टी को बड़ा झटका लग सकता है। इस सीट से दावेदारी पेश कर रही पूर्व विधायक और महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर सकती हैं। सरिता आर्या ने कहा है कि अगर पार्टी में सम्मान नहीं मिलेगा तो उनके सामने दूसरे विकल्प खुले हैं। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार देर रात उनकी भाजपा नेताओं से मुलाकात हुई। इस मुलाकात में भाजपा के प्रदेश चुनाव प्रभारी प्रहलाद जोशी, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक मौजूद थे। 

शुक्रवार रात करीब साढ़े दस बजे डालनवाला स्थित भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के फ्लैट में यह मुलाकात करीब एक घंटे चली। बताया जा रहा है कि भाजपा सरिता आर्य को नैनीताल विधानसभा सीट से प्रत्याशी बना सकती है। सरिता कांग्रेस से टिकट की दावेदारी पेश कर चुकी हैं, लेकिन इस सीट पर विधायक रहे संजीव आर्य को पार्टी हाईकमान पहले ही प्रत्याशी बनाने का वादा कर चुका है। संजीव के पार्टी में आने के बाद से ही सरिता आर्य के तेवर तल्ख हैं। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उन्हें मनाने के प्रयास किए, लेकिन वह टिकट से इतर कुछ भी मानने को तैयार नहीं है। बताते चलें कि सरिता आर्य वर्ष 2012 के चुनाव में विधायक बनीं थीं। जबकि वर्ष 2017 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्तमान में सरिता प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष हैं। 

डालनवाला स्थित जिस बिल्डिंग की बात कही जा रही है, उसमें दूसरे लोग भी रहते हैं। मैं फ्लैट संख्या 27 में शुक्रवार रात अपने एक रिश्तेदार से मिलने गई थी। कांग्रेस पार्टी छोड़ने का मेरा कोई इरादा नहीं है। मुझे तो बाद में पता चला, इस बिल्डिंग में भाजपा के कोई नेता भी रहते हैं। 
- सरिता आर्य, पूर्व विधायक और प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें