पूर्व विधायक के बाद सीधे सीएम को संबोधन के लिए बुलाने पर विधायक आदेश चौहान बिफर पड़े। उन्होंने अपनी सीट से उठकर माइक थाम लिया। इसके बाद विधायक ने क्षेत्र की समस्याओं और मांगों को लेकर अपनी फेहरिस्त सीएम के सामने रखनी शुरू कर दी। कहा कि यह भाजपा का नहीं, बल्कि सरकारी कार्यक्रम है। विधायक होने के नाते वह कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हैं। कहा कि भाजपा सरकार के पौने पांच साल के कार्यकाल में पहली बार कोई सीएम जसपुर आया है इसलिए वह यहां की जनता की मांग हर हाल में रखेंगे। उनके संबोधन के बीच में सीएम धामी उठे और माइक पकड़ लिया। इस पर विधायक चौहान मुख्यमंत्री को सुने बिना ही कार्यक्रम बीच में छोड़ कर चले गए। मंच संचालक डॉ. सुदेश का कहना था कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कार्यक्रम में करीब डेढ़ घंटे विलंब से पहुंचे थे। चार बजकर 10 मिनट पर उन्हें देहरादून लौटना था। इस कारण पूर्व विधायक डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल के बाद सीधे सीएम को बुलाना पड़ा।
सीएम ने एक-एक मांग को स्वीकृत कर गुटीय संतुलन को साधने का किया प्रयास
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी घोषणाओं के जरिये जसपुर में गुटीय संतुलन को साधने का प्रयास किया। जसपुर में स्टेडियम की घोषणा किए जाने की मांग पूर्व विधायक डा. शैलेंद्र मोहन सिंघल के ज्ञापन में प्रमुखता से थी। अपने संबोधन में डॉ. सिंघल ने इस मांग को प्रमुखता से उठाया। साथ ही उन्होंने तीरथनगर को राजस्व ग्राम घोषित करने की भी मांग रखी। सीएम धामी ने जसपुर में स्टेडियम की मांग को स्वीकार करते हुए इसके लिए भूमि चयन कराने की बात कही। कहा कि राजस्व गांव का दर्जा दिए जाने का विषय कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विनय रुहेला काफी समय से गढ़ीनेगी को नगर पंचायत का दर्जा दिए जाने की पैरवी कर रहे थे। सीएम ने गढ़ीनेगी को नगर पंचायत का दर्जा दिए जाने की घोषणा कर रुहेला का भी मान रखा। विधायक आदेश चौहान ने काशीपुर को जिला बनाने समेत तमाम मांगें प्रमखता से रखीं, लेकिन सीएम धामी ने उनकी किसी भी मांग पर कोई आश्वासन नहीं दिया।
सरकारी कार्यक्रम की आड़ में भाजपा का प्रचार करने का आरोप
विधायक आदेश चौहान ने सीएम के जसपुर कार्यक्रम को सरकारी धन की फिजूलखर्ची बताया। कहा कि जसपुर में प्रस्तावित सभी योजनाएं एक करोड़ रुपये से कम धनराशि की है। इतनी लागत की योजनाओं का शिलान्यास आमतौर पर क्षेत्रीय विधायक या मंत्री करते हैं, लेकिन भाजपा के पार्टी के प्रचार प्रसार के लिए इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन कर सरकारी धन की बर्बादी की है। सभा स्थल पर मंच को छोड़कर पूरे पंडाल में भाजपा के झंडे लगाए गए हैं।
जनसभा स्थल पर बैनर लगाने के लिए आपस में भिड़े भाजपाई, पुलिस को करना पड़ा हस्तक्षेप
जसपुर में सीएम की जनसभा स्थल पर बैनर लगाने को लेकर भाजपा में टिकट के दावेदार नेताओं और उनके समर्थकों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। दो गुटों के कार्यकर्ता बैनर लगाने को लेकर आमने-सामने आ गए। सूचना पर टीम के साथ पहुंचे कोतवाल जगदीश सिंह देउपा ने कार्यकर्ताओं को समझा बुझाकर स्थिति संभाली। पुलिस ने मंच बायीं ओर चार प्रमुख नेताओं के बैनर बराबर-बराबर साइज के लगवाए, तब जाकर विवाद निपटा।
भाजपा के नेताओं को दी गई भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी
सीएम के जसपुर कार्यक्रम को देखते हुए पार्टी ने सभी गुटों के नेताओं को सभास्थल पर भीड़ जुटाने का दायित्व सौंपा। जनसभा की तैयारियों को देख रहे भाजपा के जिलाध्यक्ष शिव अरोरा ने दो दिन पूर्व कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर पूर्व विधायक डा. शैलेंद्र मोहन सिंघल, पार्टी प्रवक्ता विनय रुहेला, शीतल जोशी, मुकेश कुमार, ब्लाक प्रमुख जगतार सिंह भुल्लर और मनोज पाल आदि को लोगों को सभास्थल तक लाने की जिम्मेदारी दी गई। मंच पर जसपुर से टिकट के दावेदारों के अलावा काशीपुर से विधायक हरभजन सिंह चीमा समेत टिकट के चार प्रमुख दावेदार मेयर ऊषा चौधरी, राम मेहरोत्रा, आशीष गुप्ता और गुरविंदर चंडोक मौजूद रहे।
समर्थकों संग भाजपा में शामिल हुईं चेयरमैन गायत्री सिंह
जसपुर। नगर पंचायत महुआडाबरा की चेयरमैन गायत्री सिंह अपने समर्थकों के साथ सीएम की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हो गईं। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी और भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया। गायत्री सिंह ने नगरपंचायत चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की थी।
सरकारी अस्पताल के संविदा कर्मियों ने की नवीनीकरण की मांग
काशीपुर के सरकारी अस्पताल के संविदा कर्मियों ने नवीनीकरण की मांग को लेकर सीएम पुष्कर धामी को ज्ञापन सौंपा। सीएम को दिए ज्ञापन में संविदा पर तैनात रहे कर्मियों ने कहा कि वह पिछले 13 साल से काशीपुर के सरकारी अस्पताल में संविदा कर्मचारी के तौर पर सेवा दे रहे थे। वर्ष 2020-21 में भी अस्पताल प्रशासल ने उनके नवीनीकरण की सारी औपचारिकताएं पूर्ण करा ली थीं, लेकिन समय पूरा होने से पहले ही उन्हें बगैर नोटिस के हटा दिया गया। जबकि उन्होंने कोरोना काल में भी नियमित ड्यूटी की।