पिछले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में मची भगदड़ के बीच भाजपा में शामिल होने वाले कांग्रेसियों को खबरनवीसों ने ‘मोदी कांग्रेस’ का नाम दिया था। यही वजह रही कि उनके बागी तेवर की हर खबर पीएम दरबार में पहुंचती रही। तीन बार मुख्यमंत्री बदलने पर भी जब ‘मोदी कांग्रेस’ से किसी को चेहरा नहीं बनाया गया तो क्षत्रपों में नाराजगी बढ़नी स्वाभाविक थी।
भाजपा ने डैमेज कंट्रोल के तहत यह कदम उठाया
ऐसे में पहले यशपाल आर्य ने पार्टी छोड़ी अब नया नाम हरक सिंह रावत का जुड़ गया है। सियासी जानकारों का मानना है कि भाजपा भले ही उन्हें बर्खास्त करने की बात कह रही है लेकिन उनके जाने की पुष्टि होने के बाद भाजपा ने डैमेज कंट्रोल के तहत यह कदम उठाया।
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ठीक चुनाव से पहले ‘मोदी कांग्रेस’ से असहज नजर आ रही भाजपा कड़ा निर्णय लेने से बच रही थी। यशपाल के कांग्रेस में शामिल होने के दौरान उमेश शर्मा ‘काऊ’ के भी कांग्रेस में जाने की चर्चा थी लेकिन उन्हें दिल्ली हाईकमान ने मैनेज कर लिया पर उनके तेवरों ने देहरादून के एक कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत को काफी असहज कर दिया था। इस बीच हरक अपनी नाराजगी जग जाहिर करते रहे हैं।
रविवार देर शाम जब सोशल मीडिया पर हरक के कांग्रेस में जाने के कयास लगने लगे तो भाजपा ने भी अबकी बार कदम पीछे खींचने के बजाय उन्हें बाहर का रास्ता दिखाना ही मुनासिब समझा। इस कदम से पार्टी हाईकमान ने ‘मोदी कांग्रेस’ के साथ ही पार्टी से नाराज चल रहे उन कार्यकर्ताओं को भी आइना दिखाने की कोशिश की है जो टिकट नहीं मिलने की सूरत में बगावत का झंडा बुलंद करने की सोच रहे हैं।
आपदा में तो सांप-नेवला भी एक हो जाते हैं
बीते दिनों प्रदेश के पूर्व सीएम हरीश रावत को हरक सिंह रावत ने बड़ा भाई बताते हुए उनके खिलाफ कुछ भी बोलने से इंकार किया था। इसके बाद हरीश रावत ने उन्हें फोन कर कहा था कि आपदा में तो सांप और नेवला भी एक हो जाते हैं, फिर वे दोनों तो भाई हैं।