उत्तराखंड बनने के 17 साल पूरे वाले हैं लेकिन राज्य की बुनियादी शिक्षा की नींव आज भी कमजोर है।
राज्य के सभी प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों में अब तक पेयजल, शौचालय और बिजली की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी है। प्राइमरी के 2954 विद्यालयों में बिजली, 562 में पानी, 920 में शौचालय नहीं तो अपर प्राइमरी के 421 स्कूल बिजली, 171 पानी और 252 स्कूल शौचालय विहीन हैं। स्कूलों में संसाधनों की कमी के अलावा अध्यापकों के भी तमाम पद रिक्त पड़े हैं।
राज्य का जन्म होने से लेकर अब तक प्रदेश में निर्वाचित चार सरकारें काबिज हो चुकी हैं जिनमें दो बार कांग्रेस और दो बार भाजपा की सरकार बनीं। मगर प्राइमरी से लेकर माध्यमिक शिक्षा का हाल जस का तस ही बना हुआ है।
प्रदेश में 12,539 सरकारी प्राइमरी स्कूल संचालित हो रहे हैं जिसमें 4,20,239 बच्चे पंजीकृत हैं। इसके अलावा सहायता प्राप्त, निजी एवं अन्य विद्यालयों में पढ़ने वाले 6,62,675 बच्चों की संख्या जोड़ लें तो इनकी संख्या 10 लाख 82,914 पहुंच जाएगी। इसी तरह कक्षा छह से आठ तक के सरकारी अपर प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की स्थिति देखें तो उनमें 2,61,816 बच्चे पंजीकृत हैं और सहायता प्राप्त, निजी एवं अन्य विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 3,34,564 है।
इस तरह इसमें कुल 5,96,381 बच्चे अध्ययनरत हैं। आरटीई के अनुसार राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में अध्यापकों के स्वीकृत पद 27,451 हैं जिनमें से 1051 रिक्त हैं। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में 8446 स्वीकृत पदों में से 858 अध्यापकों के पद रिक्त चल रहे हैं। अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों की स्थिति भी कोई बेहतर नहीं है। इनमें 1594 स्वीकृत पदों में से 625 पद खाली पड़े हैं।
प्राइमरी पाठशाला की स्थिति
जिले - कुल स्कूल - पुनर्निर्माण - जर्जर - पेयजल रहित - शौचालय विहीन - बिजली रहित
अल्मोड़ा 1408 56 25 27 07 277
बागेश्वर 603 38 85 35 48 127
चमोली 972 23 138 11 13 643
चंपावत 516 12 45 42 23 171
देहरादून 947 73 144 21 28 39
पौड़ी 1644 03 21 124 72 370
हरिद्वार 678 38 32 21 03 45
नैनीताल 984 20 29 19 188 130
पिथौरागढ़ 1183 67 148 69 218 651
रुद्रप्रयाग 568 08 11 11 12 105
टिहरी 1476 110 201 89 170 295
यूएस नगर 790 15 30 11 121 47
उत्तरकाशी 770 16 136 82 17 54
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कुल - 12,539 479 1045 562 920 2954
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माध्यमिक शिक्षा की स्थिति
स्तर - राजकीय - सहायता प्राप्त - योग - असहायता प्राप्त - समाज कल्याण - केंद्रीय विद्यालय - योग
इंटर कालेज 13900, 324 1714 584 01 59 2358
हाईस्कूल 939 66 1005 282 14 04 1305
राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की स्थिति
पद स्वीकृत कार्यरत रिक्त पद
प्रधानाचार्य 1390 889 501
प्रधानाध्यापक (हाई.) 939 205 734
प्रवक्ता 12381 7508 4873
सहायक अध्यापक(एलटी) 17779 14546 3233
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कुल 32,489 23,148 9341
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छह साल में घटे एक लाख पांच हजार बच्चे
प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम वर्ष 2011 में लागू हुआ था। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत गरीब बच्चों के पब्लिक स्कूलों में कक्षा एक में निशुल्क दाखिले की प्रक्रिया शुरू हुई। वर्ष 2011 से लेकर अब तक प्रदेश के निजी स्कूलों में एक लाख पांच हजार बच्चों का इस अधिनियम के अंतर्गत निशुल्क दाखिला कराया जा चुका है। इस तरह सरकारी स्कूलों में इतनी छात्र संख्या घट गई। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले इन बच्चों की फीस सर्वशिक्षा अभियान के बजट से भुगतान की जाती है। वर्ष 2015-16 सत्र का 9.75 करोड़, वर्ष 2016-17 का 81 करोड़ और वर्तमान का 114 करोड़ की राशि फीस की बकाया हो चुकी है।
सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत भारत सरकार से प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों में संसाधनों को पूर्ण करने के लिए मांग की जाती रही है लेकिन छह वर्षों से डिमांड की मात्र 49 प्रतिशत राशि ही भारत सरकार से मिल पाई है। इस वजह से सभी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इस वर्ष भारत सरकार को 921 करोड़ का प्रोजेक्ट भेजा गया था, प्रोजेक्ट स्वीकृत भी हुआ मगर मिला मात्र 412 करोड़ ही है।
- मुकुल कुमार सती, राज्य अपर परियोजना निदेशक, सर्वशिक्षा अभियान, उत्तराखंड