विद्यालयी शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय वैसे तो खेल एवं युवा और पंचायतीराज विभाग के भी मंत्री हैं मगर उनका मुख्य फोकस उत्तराखंड के शिक्षा महकमे पर ही ज्यादा है। वे शिक्षा विभाग में लिए बेबाक फैसलों को लेकर खासे सुर्खियों में हैं। कमान संभालते ही पांडेय ने विभागीय शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड लागू कर दिया। इस निर्णय से शिक्षकों में बेचैनी है।
पांडेय ने स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों की अनिवार्यता कर दी। उनका दावा है कि इस निर्णय से पांच साल में सरकार और अभिभावकों के 1800 करोड़ रुपये की बचत होगी। उन्होंने संकल्प लिया है कि नए शैक्षणिक सत्र से प्रदेश का एक भी विद्यालय बगैर शिक्षक के नहीं रहेगा लेकिन उनके कौशल की असल परीक्षा तबादलों को लेकर होगी। हालांकि उनका दावा है कि तबादलों में वह पूरी पारदर्शिता बरतेंगे। अमर उजाला के मुख्य संवाददाता राकेश खंडूड़ी ने 100 दिन के काम-काज पर पांडेय और उनके महकमे से संबंधित मसलों पर आमजन से बातचीत की। विधानसभा के निवासियों से भी प्रतिक्रिया ली गई। पेश है ये रिपोर्ट:-
आगाज तो अच्छा है, अंजाम खुदा जाने
विजन डाक्यूमेंट में वादे
- व्यवसायिक एवं शैक्षिक भ्रष्टाचार को रोकना और इसके खिलाफ कड़े कदम उठाना।
-अतिथि शिक्षक, संविदा शिक्षक व गैर शिक्षक कर्मियों का विभाग में समायोजन करना।
- विभाग में सुगम व दुर्गम की पारदर्शी तबादला नीति लाना।
-प्रत्येक जनपद में छात्राओं के लिए एक आवासीय विद्यालय का गठन करना।
-नई युवा नीति बनाना और युवाओं की ऊर्जा का उपयोग करने को कौशल विकास पर जोर।
-पंचायती राजसंस्थाओं को पर्याप्त प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार देना।
- पंचायत कार्यालयों का आधुनिकीकरण करना।
100 दिन का काम
-शिक्षा विभाग में शिक्षकों पर ड्रेस कोड लागू करने के आदेश दिए।
-फर्जी डिग्रियों के आधार पर नौकरी पाने वालों की एसआईटी जांच।
- आचार संहिता के दौरान हुए तबादलों को रद्द किया, पारदर्शी तबादला व्यवस्था पर जोर।
- शिक्षकों को दोपहर के भोजन व्यवस्था से मुक्त करने को सेंट्रेलाइज किचन योजना की हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल व यूएसनगर से शुरुआत।
- सरकारी व बोर्ड से संबद्ध निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों की अनिवार्यता, हर साल पाठ्यक्रम बदलने पर रोक।
-कक्षा छह से 12 के करीब 500 स्कूलों में सीएसआर फंड से फर्नीचर की व्यवस्था होगी।
-स्कूलों में बुक बैंक खुलेंगे, गरीब बच्चों को मुफ्त किताबें देंगे।
-15 साल दुर्गम में सेवा करने वाले का तबादला बिना सिफारिश के सुगम में होगा।
- हर जिले में आवासीय विद्यालय की स्थापना की जाएगी।
-प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश शुल्क व कॉशन मनी पर रोक। कमेटी का गठन किया।
-विभाग के शिक्षकों व कर्मियों का अटैचमेंट खत्म किया।
- विद्यालयों में माह के अंतिम शनिवार को प्रतिभा दिवस मनेगा।
-स्कूलों में छात्रों व अभिभावकों के लिए शिकायत प्रकोष्ठ का गठन।
मुझे बहुत बड़ी जिम्मेदारी का देवतुल्य काम मिला है। जो 30 साल में नहीं हुआ, वो तीन साल में करके दिखाऊंगा। उत्तराखंड में शिक्षा को व्यवसाय बना दिया है। मेरा मानना है कि इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार सिर्फ कहने भर से नहीं बल्कि इस पर करारी चोट करके खत्म होगा। मैं कोशिश कर रहा हूं। एनसीआरटीई की किताबें अनिवार्य करके मैंने किताबों के कथित भ्रष्ट धंधे पर चोट की है। इससे 1800 करोड़ रुपये की बचत होगी। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसी है। तबादलों में पूरी पारदर्शिता ला रहा हूं।
-अरविंद पांडेय, विद्यालयी शिक्षा मंत्री
किसी सरकार या मंत्री के काम का मूल्यांकन करने के लिए 100 दिन का समय कम है। फिर भी शिक्षा मंत्री सही दिशा में काम कर रहे हैं। सरकारी स्कूलों के साथ निजी स्कूलों की मनमानी पर भी अंकुश लगना चाहिए। लेकिन हर मंत्री स्टार्ट ऐसे ही करते हैं। यह समय बताएगा कि उनके निर्णय लागू भी हो पाते हैं कि नहीं। उन्हें अतिथि शिक्षकों के बारे में उतनी ही गंभीरता से सोचना चाहिए।
- प्रमोद सिंह, सिमली, चमोली निवासी
शिक्षा मंत्री ड्रेस कोड जैसे मुद्दों पर उलझे हैं। स्कूलों की बेहतरी, रिजल्ट में सुधार, शैक्षणिक गुणवत्ता जैसे बिंदुओं पर अभी बात नहीं हुई। पहाड़ के संसाधन और शिक्षकविहीन स्कूलों की सुध लेने की उनसे अपेक्षा है। नियुक्तियों पर रोक हटनी चाहिए। सरकार को इन सभी बिंदुओं पर सोचना चाहिए।
-देवी जोशी, नारायण विहार, देहरादून