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शिक्षा मंत्री ने खोली टीचर की पोल, बोले अगर गलत साबित हुआ तो इस्तीफा दे दूंगा

Thu, 14 Sep 2017 06:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
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शहीद नरपाल सिंह राजकीय इंटर कॉलेज थानों में निरीक्षण के दौरान शिक्षिका से कथित अभद्रता के आरोप में घिरे शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने बुधवार को चुप्पी तोड़ी। उन्होंने सबके सामने श‌िक्ष‌िका की पोल खोल दी। साथ ही कहा, अगर गलत साब‌ित हुआ तो इस्तीफा दे दूंगा। 
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उन्होंने, स्पष्ट किया कि शिक्षकों के प्रदर्शन से दबने वाले नहीं हैं। कहा, गलत साबित हुआ तो इस्तीफा दे देंगे। वहीं अभद्रता को लेकर शिक्षा मंत्री विरोध में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में शिक्षकों ने प्रदर्शन किया और कहा कि शिक्षा मंत्री ने शिक्षिका का सार्वजनिक अपमान किया। इसलिए उन्हें माफी मांगनी होगी।

 बुधवार को हल्द्वानी में एकल अभियान के कार्यक्रम में पहुंचे शिक्षा मंत्री ने कहा, मैं अब तक चुप था। अपने स्कूल की बदनामी न हो इसलिए अब तक चुप्पी नहीं तोड़ी, लेकिन आज बोल रहा हूं।
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उन्होंने कहा कि स्कूल की शिक्षिका ने बच्चों से कहा था कि विज्ञान की किताब मत लाना और जब वह निरीक्षण को कक्षा में पहुंचे तो एक भी बच्चे के पास विज्ञान की किताब नहीं थी। शिक्षिका कुंजी देखकर बोर्ड पर लिख रही थीं।

 सीसीटीवी न लगाने पर पब्लिक स्कूलों पर होगी कार्रवाई

उन्होंने तुरंत प्रधानाचार्य को कक्षा में बुलाया और सुधार करने की हिदायत देकर छोड़ दिया था। कहा, इसमें कोई भी बात गलत साबित होगी तो मैं पद से तत्काल इस्तीफा दे दूंगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षा निदेशक को सख्त आदेश हैं कि विद्यालयों में कुंजी और गाइड से बिल्कुल न पढ़ाया जाए। शिक्षक हैं कि सुधरने को तैयार ही नहीं है। गरीब बच्चों को शिक्षकों को ईमानदारी से पढ़ाना ही होगा।

इसी उद्देश्य से वह स्कूलों का निरीक्षण कर रहे हैं ताकि कुछ सुधार हो जाए। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर किसी से छिपा नहीं है। शिक्षा मंत्री बोले, प्रदेश भर में शिक्षक धरना प्रदर्शन कर मुझ पर दबाव बनाना चाहते हैं, लेकिन मैं किसी से दबूंगा नहीं। मैं मजदूर का बेटा हूं। मंत्री रहूं न रहूं, स्कूलों के निरीक्षण कार्यक्रम को बंद नहीं करूंगा। किसी से अभद्र बोलना तो मेरे स्वभाव में ही नहीं है।  

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि प्रत्येक पब्लिक स्कूल को अपने यहां सीसीटीवी लगाने होंगे अन्यथा बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 
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उच्च न्यायालय के आदेशों को लेकर सरकार गंभीर

​उन्होंने बताया कि गुरुग्राम के रायन पब्लिक स्कूल में बच्चे की हत्या की घटना के मद्देनजर शिक्षा निदेशक और अपर सचिव को सरकार ने सख्त आदेश दिए हैं कि प्रदेश के सभी कान्वेंट स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कराए जाएं तथा लापरवाही बरतने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाए । सरकारी स्कूलों में इस तरह के इंतजाम क्यों नहीं है, इस पर शिक्षा मंत्री बोले कि सरकारी स्कूलों में शिक्षक सरकारी होते हैं इसलिए वहां इस तरह की घटनाएं होने की आशंकाएं कम ही रहती हैं।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में बच्चों के लिए फर्नीचर, पेयजल और शौचालयों की व्यवस्था किए जाने संबंधी उच्च न्यायालय के आदेशों को लेकर सरकार पूरी तरह गंभीर हैं। राज्य के विभिन्न स्थानों पर चल रहे स्कूलों में फर्नीचर पहुंचना शुरू हो गया है। स्कूलों में बाकी सुविधाएं भी पूरी किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। गरीब बच्चों को भी बेहतर ढंग से पढ़ाई की सुविधाएं मिल सकें, इसकी कोशिश है।

शिक्षकों के अभाव में पढ़ाई प्रभावित होने के लिए वह जिम्मेदार
शिक्षकों की कमी के सवाल पर शिक्षामंत्री ने कहा कि अतिथि शिक्षकों का मामला न्यायालय में लटका होने की वजह से यह हालात बने हैं। सरकार तय नहीं कर पा रही कि विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों पर तैनाती कैसे करे। राज्य के विद्यालयों में करीब सात हजार शिक्षकों के पद खाली हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के लिए वे खुद को ही जिम्मेदार मानते हैं।
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