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उत्तराखंड: 44 साल पहले भी हरिद्वार में आया था भूकंप, आईआईटी की ऐतिहासिक बिल्डिंग में आ गई थी दरारें 

Wed, 02 Dec 2020 02:12 AM IST
अलका त्यागी अंकित कुमार गर्ग, अमर उजाला, रुड़की

सार

  • हिमालयन फॉल्ट कभी भी बन सकता है बड़ा खतरा 
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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हरिद्वार जिले में भूकंप ने 44 साल बाद एक बार मंगलवार को फिर दस्तक दी है। आईआईटी के पूर्व वैज्ञानिकों ने 1976 में आए भूकंप की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय भूकंप का केंद्र भगवानपुर में धरती की सतह से करीब दस किलोमीटर गहराई में था।

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उस दौरान भूकंप के झटकों को लोगों ने न केवल अच्छी तरह महसूस किया था बल्कि आईआईटी रुड़की की ऐतिहासिक मेन बिल्डिंग में कुछ जगहों पर दरारें तक आ गई थी। अब इतने साल बाद फिर से आए भूकंप के मायने तलाशने के लिए आईआईटी वैज्ञानिकों की टीम अध्ययन में जुट गई है। 


हरिद्वार जिले में लंबे अंतराल के बाद भूकंप को वैज्ञानिक अस्वाभाविक नहीं मान रहे हैं, बल्कि भूकंपीय दृष्टिकोण और आगामी खतरे को लेकर इसके तरह-तरह के निहितार्थ भी वैज्ञानिक खोजने में जुट गए हैं। आईआईटी रुड़की के अर्थक्वेक डिपार्टमेंट में वैज्ञानिकों की टीम ने अध्ययन शुरू कर दिया है।
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संस्थान के भूकंप अध्ययन केंद्र में एक दिसंबर को आए भूकंप की तीव्रता दर्ज की गई है। इससे पहले इस क्षेत्र में कितने भूकंप आए हैं और उनका किस तरह का इतिहास रहा है, इसे लेकर भूकंप की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।

उत्तराखंड में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने वाले आईआईटी के पूर्व वैज्ञानिक प्रो. अशोक कुमार से हरिद्वार में आए भूकंप के बारे में जानकारी ली गई। इसपर उन्होंने बताया कि हरिद्वार क्षेत्र में इससे पहले 1976 में 4.5 से 5.0 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र भगवानपुर था।

इस भूकंप के झटकों से आईआईटी की मेन बिल्डिंग में भी कुछ जगहों पर दरारें आई थी। उन्होंने बताया कि इतने सालों बाद भूकंप को अस्वाभाविक नहीं माना जा सकता है। क्योंकि भूकंप के लिहाज से पूरा हिमालयी क्षेत्र संवेदनशील है, लेकिन फिर भी भूकंप की प्रवृत्ति के विषय में यह कहना असंभव है कि एक भूकंप के बाद दूसरा भूकंप कब आएगा। ऐसे में लोगों को भूकंप से पूर्व के इंतजामों के प्रति जागरूक रहना होगा।  

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रुड़की से 34 किलोमीटर दूर था भूकंप का केंद्र 

आईआईटी वैज्ञानिकों ने हरिद्वार में आए भूकंप का अध्ययन शुरू कर दिया है। वैज्ञानिकों के अनुसार सुबह नौ बजकर 41 मिनट पर आए भूकंप की तीव्रता 4.0 मैग्नीट्यूड थी। जबकि 41.9 किलोमीटर गहरे भूकंप का केंद्र टिहरी बांध से दक्षिण पश्चिम दिशा में 49.39 किमी दूरी पर था। वहीं हरिद्वार से उत्तर-पश्चिमी दिशा में इसकी दूरी 25 किमी थी। 

भूकंप अभियांत्रिकी विभाग, आईआईटी रुड़की की ओर से गढ़वाल हिमालय में लगाए गए टिहरी नेटवर्क में दर्ज आंकड़ों के आधार पर भूकंप की स्थिति की गणना की गई है। इस नेटवर्क के 18 स्टेशन के साथ-साथ रुड़की सीस्मोलॉजिकल ऑब्जर्वेटरी पर भी भूकंप दर्ज किया गया है।

वैज्ञानिक प्रो. एमएल कंसल ने बताया कि भूकंप के स्रोत की गहराई लगभग 40 किमी मापी गई है। तीव्रता और गहराई के कारण, देहरादून, रुड़की, लक्सर और हरिद्वार सहित आसपास के क्षेत्रों में भूकंप का अनुभव किया गया है।

इस भूकंप से किसी भी क्षेत्र में किसी तरह के नुकसान की आशंका नहीं है। रुड़की ऑब्जर्वेटरी से इसकी दूरी लगभग 34 किमी होने का अनुमान है। भूकंप के स्रोत का कारण हिमालयन फ्रंटल फाल्ट हो सकता है जो इस क्षेत्र में स्थित है। भूकंप के लिहाज से यह क्षेत्र काफी संवेदनशील है और वर्तमान भूकंप इस क्रम में आने वाले भूकंपों में से एक है।
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