नीती घाटी में द्रोणागिरी गांव धार्मिक मान्यता से भी जुड़ा है। मान्यता है कि श्रीराम-रावण युद्ध के समय हनुमान द्रोणागिरी गांव से संजीवनी बूटी के लिए पर्वत का एक बड़ा हिस्सा उखाड़ ले गए थे। पर्वत को स्थानीय ग्रामीण देवता के रूप में पूजते हैं।
हनुमान से आज भी द्रोणागिरी गांव के ग्रामीण नाराज हैं, यही वजह है कि गांव में आज भी हनुमान की पूजा नहीं होती है। यहां तक कि रामलीला में भी हनुमान का अध्याय शुरू होते ही मंचन समाप्त कर दिया जाता है।
द्रोणागिरी में बनेगा संजीवनी गार्डन
इसी वर्ष नौ नवंबर को राज्य स्थापना दिवस पर ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने द्रोणागिरी गांव में संजीवनी गार्डन की स्थापना की घोषणा की थी। 15 लाख की लागत से यह गार्डन तैयार होगा। यदि यह गार्डन तैयार होता है, तो द्रोणागिरी गांव में पर्यटन भी बढ़ेगा।