उत्तराखंड में जून माह की जलप्रलय से पिंडरघाटी में अब भी जनजीवन नहीं उबर पाया है। घर, दुकानें गंवा चुके लोगों के सामने कई प्रकार की चुनौतियां मुंह बाएं खड़ी हैं।
दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए एसबीआई का डंडा प्रभावितों के जख्मों पर नमक का काम कर रहा है। जिन प्रभावितों ने पूर्व में एसबीआई की विभिन्न योजनाओं से लोन लिया हुआ था, उसकी भरपाई अब बैंक प्रभावितों को मिले मुआवजा राशि के चेक से वसूल कर रहा है।
स्थिति यह है कि दो लाख के मुआवजा वाले चेक से भी 18 से 57 हजार रुपए तक काटे जा चुके हैं। प्रभावित दीवानी राम व प्रेम कुमार का कहना है कि घर आपदा की भेंट चढ़ चुका है।
केस एक
थराली के सुरेश चंद्र भारती दुकान चलाते हैं। बैंक से कुछ वर्ष पूर्व शिक्षित-बेरोजगार के तहत बेटे के नाम पर लोन लिया था। किस्तें जमा हो रही थी। लेकिन आपदा से समय पूर्व ही पत्नी की तबियत खराब हो गई। इलाज के लिए दिल्ली सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। आपदा में आवासीय मकान क्षतिग्रस्त हो गया। दो-तरफा मुश्किलों से घिरे भारती इस दौरान लोन की किस्त जमा नहीं कर पाए। मुआवजे का 1.98 लाख का चेक मिला, जिसे एसबीआई थराली में जमा किया गया। लेकिन शाखा बैंक ने लोन की किस्त के रुप में 18 हजार रुपए काट दिए।
केस दो
थराली अपर बाजार में रहने वाले भवानी राम ने कुछ साल पूर्व हाउस लोन के तहत पत्नी के नाम पर एसबीआई थराली से लोन लिया था। तीन वर्ष पूर्व पत्नी की मृत्यु हो गई। जबकि इस वर्ष आवासीय भवन को आपदा से व्यापक नुकसान हुआ है। शासन से मुआवजे में दो लाख रुपये का चेक मिला। एसबीआई थराली में जमा किया गया। लेकिन बैंक ने लोन के 57 हजार रुपये काट दिए हैं। 22 अगस्त को सीएम विजय बहुगुणा से भी गुहार लगाई थी। लेकिन प्रभावित का धन वापस नहीं हुआ है।
इस तरह के केस सामने आए थे कि आपदा राहत राशि के चेक से लोन की किश्त काट ली गई। चूक सामने आने पर लोन धारक को पैसा लौटा दिया गया। शाखाओं को निर्देशित किया गया है कि वह आपदा पीड़ितों के मामले में अभी सावधानी बरतें। उनसे जुड़ी समस्या का त्वरित निराकरण होगा।
-डीपी पांडे, आरएम, क्षेत्र-4 (हल्द्वानी)
मुआवजा राशि के कुछ चेक प्रभावितों के खाते में जमा हुए थे। इनमें कुछ लोगों ने बैंक से ऋण लिया है। उनसे ऋण की किस्त काट ली गई थी। अब मुख्यालय से निर्देश मिलने के बाद मुआवजा धनराशि सीधे खाते में जमा हो रही है और इसमें कोई कटौती नहीं की जा रही है।
--कुलदीप कुमार, शाखा प्रबंधक, एसबीआई थराली