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उत्तराखंड की चारों क्रिकेट एसोसिएशन को एक महीने में लागू करना होगा बीसीसीआई का नया संविधान 

Thu, 23 Aug 2018 09:31 AM IST
अभिषेक सिंह, अमर उजाला, हल्द्वानी
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पूर्व सीएजी विनोद राय
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उत्तराखंड क्रिकेट इतिहास में 18 साल से छाए काले अध्याय को एक झटके में खत्म करने का श्रेय अगर किसी को जाता है तो वह शख्स है सुप्रीमकोर्ट की ओर से गठित क्रिकेट प्रशासक समिति के कर्ताधर्ता व पूर्व सीएजी विनोद राय। उन्होंने प्रदेश में कार्यरत चारों क्रिकेट एसोसिएशनों के निजी हितों के टकराव को दरकिनार कर प्रो. रत्नाकर सेट्टी की अध्यक्षता में एक कांसेंसस कमेटी गठित की। इस कमेटी में प्रदेश की सभी एसोसिएशन के कर्ताधर्ता शामिल हैं। मालूम हो कि मंगलवार को सीओए चेयरमैन विनोद राय की उपस्थिति में बीसीसीआई ने अपना नया संविधान पंजीकृत करा दिया है। इस बारे में उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में उनसे फोन पर हुई बातचीत के प्रमुख अंश।

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प्र. अगर कोई राज्य एसोसिएशन इस संविधान को 30 दिन के अंदर लागू नहीं करती हैं है तो उस स्थिति में क्या होगा ? 
विनोद राय : टीम रणजी मैच खेल सकेंगी, लेकिन कोर्ट के आदेशानुसार उन्हें बीसीसीआई से मिलने वाली वित्तीय मदद नहीं मिलेगी। 

प्र. उत्तराखंड में चार एसोसिएशन हैं, जिन्हें यूसीसीसी में जगह दी गई है। ऐसे में क्या इन एसोसिएशनों के लिए भी संविधान लागू करने की बाध्यता है?
विनोद राय : हां, यह उत्तराखंड के सभी चारों क्रिकेट एसोसिएशन पर लागू होगा। 

3-अगर ये एसोसिएशन 30 दिन के भीतर ऐसा नहीं करती हैं तो उस दशा में सीओए क्या कदम उठाएगा?
विनोद राय : ऐसे में बीसीसीआई की दौड़ में यह अपने आप बाहर हो जाएंगी। मान लीजिए ए, बी, सी, डी में से बी को बोर्ड आगामी एक साल के भीतर मान्यता देता है। अगर उस एसोसिएशन ने इस 30 दिन की अवधि में बोर्ड का संविधान लागू नहीं किया होगा तो वह अपने आप बाहर हो जाएगी।  
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4- किसी एक एसोसिएशन को मान्यता देने का आधार क्या होगा?
विनोद राय : किसी भी एसोसिएशन को मान्यता देने के लिए एक विस्तृत प्रक्रिया होती है, उसी के तहत मान्यता दी जाएगी। 

5- अगर चारों एसोसिएशन एक हो जाती हैं तो उस स्थिति में बीसीसीआई कितने दिन में उत्तराखंड को एक एसोसिएशन के रूप में मान्यता दे देगा?
- यदि सभी एसोसिएशन विलय पर राजी हो जाती हैं तो मान्यता की प्रक्रिया बहुत तेज होगी।

6- कांसेंसस कमेटी में शामिल किसी सदस्य का रिश्तेदार या बेटा टीम में चुना जा सकता है या नहीं? 
- यहां हितों के टकराव का नियम लागू होगा। 

7- कांसेंसस कमेटी पहले रणजी में ओपेन ट्रायल की बात कर रही थी, लेकिन अब जानकारी मिली है कि सभी एसोसिएशन से उनके टॉप के खिलाड़ियों के नाम मांगे गए हैं। ऐसे में दूरदराज के इलाकों में छिपे उस टैलेंट का क्या जो अभी तक किसी भी एसोसिएशन के यहां रजिस्टर्ड नहीं है।
- समिति में बीसीसीआई के लोग हैं, वे सुनिश्चित करेंगे कि मेरिट पर चयन के लिए अर्हता प्राप्त करने वाले उत्तराखंड के खिलाड़ियों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए। 

मर्जर ही प्रदेश के हित में 
अमर उजाला पहले भी कई बार सभी क्रिकेट एसोसिएशन से अनुरोध कर चुका है कि प्रदेश के खिलाड़ियों के हित में एक मंच पर आएं। अमर उजाला से हुई बातचीत में सीओए प्रमुख विनोद राय ने भी स्पष्ट कर दिया कि अगर सभी एसोसिएशन एक हो जाती हैं तो उत्तराखंड को जल्द मान्यता मिल जाएगी। एक बार अमर उजाला फिर चाहेगा कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों के हित में इस दिशा में पहल करे। 
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नया संविधान लागू होते ही एसोसिएशन से कई लोगों का कट जाएगा पत्ता 
बीसीसीआई का नया संविधान लोढ़ा कमेटी के सुझावों पर आधारित है। विनोद राय ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश में कार्यरत एसोसिएशनों को भी इस कानून को लागू करना होगा। अगर ऐसा होता है तो अलग-अलग एसोसिएशनों में जमे बैठे नौकरशाह, 70 साल से ऊपर के पदाधिकारियों को बाहर बैठना होगा।

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