प्रदेश में अस्थायी जेलों से लगातार हो रही बंदियों की फरारी की घटनाओं को देखते हुए आईजी जेल ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब बंदी के 15 दिन तक अस्थायी जेल में रहने की समयसीमा को खत्म कर दिया गया है। नए आदेश के तहत बंदी की एक या दो दिन में कोरोना की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई तो उसे तुरंत स्थायी जेल शिफ्ट किया जाएगा।
कोरोना काल में शासन की ओर से जेल के लिए कई आदेश जारी किए थे। एक आदेश था नए बंदियों को शिफ्ट करने का। इसके अनुसार, नए बंदी को स्थायी जेल से पहले 15 दिन अस्थायी जेल में रखना होता था। साथ ही कोरोना की जांच करानी होती थी, लेकिन पिछले दिनों हरिद्वार, देहरादून, चमोली और हल्द्वानी में बनाई गईं अस्थायी जेलों से हुई बंदियों की फरारी ने पुलिस, प्रशासन की चिंता बढ़ा दी थी।
एक के बाद कई घटनाओं को देखते हुए जेल आईजी एपी अंशुमान ने 15 दिन अस्थायी जेलों में बंदियों के क्वारंटीन की समयावधि में बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने सूबे की सभी स्थायी और अस्थायी जेलों को आदेश जारी किए हैं कि नए बंदी की आते ही कोरोना जांच कराएं।
एक या दिन में बंदी की रिपोर्ट निगेटिव आती है तो उसे तुरंत स्थायी जेल में शिफ्ट करें। आईजी जेल ने इस आदेश पर तुरंत अमल करने के आदेश दिए हैं। इसमें कोताही बरतने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई के आदेश भी दिए हैं।
पॉजिटिव के लिए नई गाइडलाइन
जेल आईजी एपी अंशुमान ने बताया कि पॉजिटिव आने वाले बंदियों के लिए भी नए आदेश जारी किए गए हैं। अगर कोई बंदी पॉजिटिव आता है और उसमें कोरोना के लक्षण हैं तो उसे अस्थायी जेल नहीं बल्कि कोविड केयर सेंटर में भर्ती किया जाए। जिस बंदी में कोई लक्षण नहीं हैं और वह पॉजिटिव है तो उसे 15 दिन तक अस्थायी जेल में ही रखा जाए।