उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने रेलवे को एक यात्री के सामान चोरी होने पर 37,222 रुपये का मुआवजा और 10,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च देने का निर्देश दिया है। आयोग ने जिला आयोग के आदेश को संशोधित करते हुए मानसिक पीड़ा के लिए दिए गए 25,000 रुपये हटा दिए। यह आदेश लीला धर डोभाल और अन्य की शिकायत पर दिया गया है, जिनके यात्रा के दौरान सामान की चोरी हुई थी।
यह घटना दो जुलाई को मथुरा रेलवे स्टेशन पर हुई थी। लीला धर डोभाल और उनके परिवार के सदस्य उदयपुर से नई दिल्ली जा रहे थे। वे मेवाड़ एक्सप्रेस के एसी कोच बी-2 में यात्रा कर रहे थे। ट्रेन जब मथुरा स्टेशन पर धीमी हुई, तो कुछ अज्ञात लोग कोच में घुस गए। उन्होंने लीला धर डोभाल और वीणा डोभाल का कीमती सामान और नकदी चुरा ली। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कोच के दरवाजे खुले थे। साथ ही, कोच अटेंडेंट, रेलवे सुरक्षा बल कर्मी और टीटीई भी उपलब्ध नहीं थे। रेलवे ने अपनी लापरवाही से इन्कार किया था।
देहरादून जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 11 मई 2022 को शिकायतकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया था। जिला आयोग ने रेलवे को 37,222 रुपये मुआवजा, 25,000 रुपये मानसिक पीड़ा और 10,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च देने का आदेश दिया था। रेलवे ने इस फैसले को राज्य आयोग में चुनौती दी थी।
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राज्य आयोग ने माना कि रात में आरक्षित कोच के दरवाजे खुले रखना रेलवे की लापरवाही थी। आयोग ने कहा कि कोच अटेंडेंट या पुलिस कर्मियों की अनुपस्थिति भी लापरवाही दर्शाती है। राष्ट्रीय आयोग के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि रेलवे कर्मचारियों की लापरवाही से हुई चोरी के लिए रेलवे जिम्मेदार है। आयोग ने मानसिक पीड़ा के लिए दिए गए 25,000 रुपये को हटा दिया। साथ ही, मुआवजे पर ब्याज दर नौ फीसदी से घटाकर सात फीसदी वार्षिक कर दी।