मैदानी भागों में युवाओं को नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी देने और नशा छुड़ाने के लिए कांउसलिंग सेंटर बनाए गए हैं, लेकिन पर्वतीय क्षेत्र में ऐसे सेंटरों की कमी बनी हुई है। चमोली जिले में नशे के दुष्प्रभावों को बताने के लिए एक भी कांउसलिंग सेंटर नहीं बनाया गया है।
कानून का उठाते हैं फायदा
एनडीपीएस एक्ट के तहत कोकीन, हेरोइन, एलएसडी, चरस, सुल्फा, गांजा आदि नशीले पदार्थों की बरामदगी और उनका सेवन करने पर सजा का प्रावधान है। नशे के अधिकांश सौदागर पढ़े-लिखे और कानून की जानकारी रखने वाले होते हैं। ऐसे में वे एक साथ अधिक मात्रा में नशे की तस्करी नहीं करते हैं, ताकि पकड़े जाने की दशा में कोर्ट से जमानत आसानी से मिल जाए। अधिकांश मामलों में यह भी देखा गया है कि जमानत पर छूटने के बाद आरोपी फिर से नशे के कारोबार में संलिप्त पाए जाते हैं।
नशे के खिलाफ धरपकड़ अभियान लगातार जारी है। युवाओं में बढ़ रही नशे की प्रवृति चिंताजनक है। नशे के सौदागरों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
- यशवंत सिंह चौहान, एसपी चमोली