इतना होने पर भी कांग्रेस के सामने चुनौतियां मुंह बाएं खड़ी हैं। प्रीतम पुरानी पीसीसी को भंग करने के एक माह बाद भी नई टीम की घोषणा नहीं कर पाए हैं। यही नई टीम है जिसके भरोसे उन्हें 2022 का चुनाव लड़ना भी है और पार्टी को लड़वाना भी है।
नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश का डट कर उनके साथ खड़ा होना उन्हें आश्वस्त कर सकता है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस में जड़ जमाए बैठे हरीश रावत की नाराजगी उन्हें परेशान कर सकती है। पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया में छिड़े संग्राम से यह पुष्टि हो भी गई है कि प्रीतम के लिए समस्या और अधिक तीखी होकर उभरी है। हरीश कैंप के विधायक नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश की वजह से अधिक नाराज हैं। साफ है संतुलन साधने के लिए प्रीतम को तनी हुई रस्सी पर चलना होगा।
अब कांग्रेस की निगाह 2022 के चुनाव पर हैं। विधायक दल की बैठक से लेकर पार्टी बैठकों में 2022 के लिए जादुई आंकड़ा बार-बार उभर कर सामने आता है। प्रदेश भाजपा को ध्वस्त करने के लिए प्रीतम सिंह केंद्र और प्रदेश के मुद्दों के बीच भी संतुलन साधने की कोशिश में हैं। भारत बचाओ, संविधान बचाओ रैली के जरिये सीएए, एनआरसी जैसे मामलों में शक्ति प्रदर्शन करने के बाद भी उनके तरकश में महंगाई, बेरोजगारी, देवस्थानम् अधिनियम, एनसीसी अकादमी के शिफ्ट होने जैसे मुद्दे हैं।