उत्तराखंड विधानसभा चुनाव का नतीजा चाहे जो हो, मगर इलेक्शन कैम्पेन गुरू पीके को लेकर कांग्रेस प्रत्याशियों की नाराजगी सामने आने लगी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक के बहाने राजधानी में जुटे कांग्रेस के कई प्रत्याशियों ने पीके के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली।
कुछ प्रत्याशी तो यह शिकवा करने से भी नहीं हिचके कि पीके का कैम्पेन प्रत्याशियों के बजाय मुख्यमंत्री पर फोकस रहा। बृहस्पतिवार को हुई बैठक में पार्टी प्रत्याशियों ने भितरघात को लेकर भी शिकायतें कीं।
प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रत्याशियों ने संसाधनों की कमी का मुद्दा उठाया। पार्टी के सह प्रभारी संजय कपूर ने कहा कि चुनाव के नतीजे आने के बाद पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
पूरे प्रत्याशी नहीं पहुंचे
प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ये बैठक प्रत्याशियों के चुनावी मंथन तक सीमित होकर रह गई। मुख्यमंत्री हरीश रावत भी इसमें शिरकत नहीं कर सके। कोटद्वार से वह विलंब से कांग्रेस भवन पहुंचे। संगठन ने 43 प्रत्याशियों की उपस्थिति की सूचना दी है। लेकिन सभी एक साथ बैठक में नहीं पहुंचे। उनके आने का सिलसिला चलता रहा। देहरादून जनपद से नवप्रभात, सूर्यकांत धस्माना, दिनेश अग्रवाल, रंजीत रावत, विजय पाल सिंह सजवाण, लक्ष्मी राणा, प्रकाश जोशी, करन महरा, गणेश गोदियाल समेत कई प्रत्याशी बैठक में नहीं आए। कुछ विधायक विलंब से पहुंचे लेकिन वह बैठक में शिरकत नहीं कर सके। अलबत्ता कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदयेश, प्रीतम सिंह, मंत्री प्रसाद नैथानी, मनमोहन सिंह मल्ल समेत कई प्रत्याशी मौजूद रहे।
पीके पर निकली भड़ास, उठा संसाधनों की कमी का मुद्दा
प्रशांत किशोर
- फोटो : फाइल फोटो
बंद कमरे में करीब तीन घंटे तक चली बैठक में प्रत्याशियों ने प्रशांत किशोर पर निशाना साधा। एक प्रत्याशी ने कहा कि उन्हें पीके के प्रचार से कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि वह पूरी तरह से सीएम पर फोकस था। हरिद्वार जनपद के एक प्रत्याशी का कहना था कि सीएम और प्रदेश अध्यक्ष के साथ टीम पीके की मौजूदगी ने प्रचार में एक तीसरा कोण बना दिया था, जिससे उलझाव की स्थिति पैदा हो गई। कुछ प्रत्याशियों ने चुनाव फंड न मिलने की भी शिकायत की। उनका कहना था कि उन्हें संगठन की ओर से समुचित सामग्री नहीं मिल सकी।
सीएम से लेकर अध्यक्ष तक भितरघात का शिकार
प्रत्याशियों ने चिंता जताई कि पूरे चुनाव में सीएम से लेकर अध्यक्ष तक कोई भी भितरघात से महफूज नहीं रहा। कई पार्टी नेता और कार्यकर्ता चुनाव प्रचार में जुटने के बजाय घर बैठ गए। कइयों ने दूसरे चुनाव क्षेत्रों का रुख कर लिया। मगर कई ऐसे थे जिन्होंने पार्टी प्रत्याशी को हराने के लिए कहीं भाजपा तो कहीं दूसरे दलों या निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए काम किया। सभी ने ऐसे भितरघातियों को कड़ा सबक सिखाने की मांग की।
मैं बैठक में विलंब से पहुंचा। मगर कुछ प्रत्याशियों ने भितरघात का मुद्दा उठाया है। उन सभी से लिखित में ब्योरा देने को कहा गया है। पार्टी स्तर पर ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- संजय कपूर, प्रदेश सह प्रभारी, कांग्रेस