कांग्रेस में इन ध्रुवों के उभरने का संकेत पिछले कुछ समय के घटनाक्रम से भी मिला है। पिथौरागढ़ उप चुनाव से लेकर रुड़की नगर निगम के चुनाव में प्रत्याशी चयन में प्रीतम और इंदिरा की खासी सक्रियता रही। पिथौरागढ़ में मयूख महर को मनाने का मामला सामने आया तो हरीश रावत मुखर हो गए।
तीन धड़ों की यह टकराहट कांग्रेस की भारत बचाओ, संविधान बचाओ रैली में खुलकर सामने आई। किशोर और हरीश रावत के फोटो और बैनर गायब रहने को लेकर इन नेताओं के समर्थक अंदरखाने उलझे। कुछ हाईकमान का डर रहा कि यह टकराहट खुलकर सामने नहीं आई।
अब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह नई टीम घोषित करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि नई टीम के मैदान में उतरने के तुरंत बाद ही यह अंदरूनी संघर्ष और तीखा होकर सामने आएगा। पुरानी टीम में किशोर और हरीश रावत के समर्थकों की फौज रही है और नई टीम को जंबो न बनाने का दबाव प्रीतम सिंह पर है। ऐसे में प्रीतम को कई नेताओं की नाराजगी का सामना भी करना पड़ सकता है।