मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि दो साल में उत्तराखंड रोड टू ऑल यानी सबको सड़क की दिशा में अग्रसर होगा। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव में लोग उन्हें इसलिए चुनेंगे क्योंकि पहली बार राज्य में समावेशी विकास की बात हो रही है।
पीएम नरेन्द्र मोदी के उत्तराखंड दौरा तय हो जाने पर उन्होंने कहा कि अच्छा होता तब आते, जब हमें जरूरत थी। उनका आरोप है कि भाजपा ने मोदी को केदारनाथ आने से रोका।
बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री अचानक अमर उजाला कार्यालय में पहुंचे तो इस दौरान उनसे कुछ मसलों पर बातचीत हुई। पेश है मुख्य संवाददाता राकेश खंडूड़ी से बातचीत के कुछ अंश:-
आपने ऐसा क्या किया कि जनता कांग्रेस को वोट करे?
हरीश रावत
- फोटो : AmarUjala
हम राज्य के समावेशी विकास की बात कर रहे हैं। ये बहुत पहले हो जाना चाहिए था। हमने इस दिशा में इनिशिएटिव लिया है। राज्य में औद्योगिकीकरण का पक्षधर मैं भी हूं, लेकिन मेरा फोकस छोटे उद्योगों पर है। मैं वही कर रहा हूं जो लोग सोचते हैं। मैं लोगों को अपनी सोच के साथ ले जाना चाहता हूं। जानता हूं कि नारे लगाने से पलायन नहीं रुकेगा। लोगों का स्वभाव बदलना होगा। मैं लोगों को सहमत कराने का प्रयास कर रहा हूं।
उपलब्धि के तौर पर आपके खाते में क्या है?
ढाई साल में बिजली की स्थिति सुधरी है। हम सस्ती बिजली दे रहे हैं। पेंशन का दायरा 1.74 लाख से बढ़ाकर 7.25 लाख किया। इसे 200 रुपए से बढ़ाकर 1000 कर दिया। ये कोई छोटी यात्रा नहीं है। भाजपा ने पांच साल में 500 सड़कों पर हमने दो साल में 1102 सड़कों पर काम शुरू किया। 2018-19 के वित्तीय वर्ष में हम रोड टू ऑल यानी सबको सड़कों की दिशा में ले जाएंगे।
कहां से चुनाव लड़ रहे हैं?
चुनाव जरूर लड़ूंगा। जल्द ही मैं चुनाव पर फोकस करूंगा। पर उससे पहले मैं बजट को विभागों तक पहुंचा देना चाहता हूं ताकि मार्च तक कोई परेशानी न रहे।
'मोदी जी तब आते जब हमें जरूरत थी'
हरीश रावत
- फोटो : Self
पीएम मोदी उत्तराखंड आ रहे हैं, क्या कहेंगे?
मैंने उन्हें दो बार बुलाया। केदारनाथ आने का न्योता दिया, लेकिन भाजपा केदारनाथ से घबरा रही है। वह जानती है कि जो जाएगा तारीफ करेगा। इसलिए भाजपा ने मोदी जी को केदारनाथ आने से रोका। अब क्या फायदा, मोदी जी तब आते जब हमें जरूरत थी। केंद्र ने 7998 करोड़ का पैकेज मंजूर किया, लेकिन सरकार को महज 1300 करोड़ ही मिले। कोई मुझे बता दे कि उत्तराखंड में कौन सी रोड सीजनल है, जिसे मोदी जी आकर ऑलवेदर करना चाहते हैं।
जुमे की नमाज को लेकर सियासी बवाल पर क्या कहेंगे?
इसमें कोई विवाद जैसी बात है ही नहीं। कैबिनेट नोट पढ़ लें, सरकार की मंशा वह नहीं थी, जैसा बवाल मचाया गया।