विदेशी शराब के लाइसेंस में बंदरबांट के स्टिंग को लेकर पिछली 22 जुलाई को दिल्ली से देहरादून तक हलचल मची थी।
अब यह मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। पूर्व संयुक्त सचिव उच्च शिक्षा डॉ. बहादुर सिंह बिष्ट ने स्टिंग के वीडियो में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई शुक्रवार को होने की संभावना है।
याचिका में कहा गया है कि एफएल टू (विदेशी शराब) के थोक विक्रय का ठेका प्राइवेट फर्म को दिए जाने की डील का स्टिंग पिछले माह मीडिया में आया था। इस प्रकरण से प्रदेश के ईमानदार अधिकारियों तथा राजनीतिज्ञों के साथ-साथ संपूर्ण प्रदेश की छवि को धक्का लगा है।
ऐसी गतिविधियों से आम जनता का सरकार से विश्वास उठ रहा है। याची के मुताबिक यदि सीडी में दिखाए गए आरोप सच हैं, तो मामला गंभीर है। इसकी निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी जैसे सीबीआई या न्यायिक आयोग से करानी चाहिए थी।
लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है। याचिकाकर्ता ने जनहित में मामले की जांच कराने का अनुरोध कोर्ट से किया है।
बताते चलें कि भाजपा ने पिछले माह एक स्टिंग का वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री हरीश रावत पर आबकारी नियमों में बदलाव करने और निजी सचिव के माध्यम से शराब लाइसेंस बांटने में धांधली का आरोप लगाया था।