उत्तराखंड के सीएम के सचिव के कथित स्टिंग की जांच तो दो कदम भी नहीं बढ़ी, लेकिन स्टिंग प्रसारण के पीछे जिन अशोक पांडेय का नाम आया, वह सरकार के निशाने पर आ गए हैं।
एमडीडीए ने उनके घर को गिराने को नोटिस दरवाजे पर चस्पा कर दिया है और तीन दिन का समय दिया है। इधर, अशोक पांडेय ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए उच्च न्यायालय जाने का निर्णय लिया है।
उत्तराखंड ही नहीं देश भर की राजनीति में भूचाल लाने वाले सीएम हरीश रावत केसचिव मोहम्मद शाहिद के स्टिंग आपरेशन में जांच तो शुरू नहीं हुई लेकिन विरोधी पक्षकारों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है।
इस मामले की दिल्ली में विगत 22 जुलाई को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के कारण पत्रकार अशोक पांडेय सरकार के निशाने पर आ गए है। इस कार्रवाई को पिछले दिनों सीएम के उस बयान से जोड़कर भी देखा जा रहा है जिसमें स्टिंग में शामिल लोगों की संपत्ति की जांच कराने की बात कही गई है।
पांडेय का नारी शिल्प मंदिर मार्ग पर टैगोरविला में निर्माणाधीन मकान है। उन्होंने बताया कि इस घर का नक्शा पहले बन गया था उसकी पांच साल की मियाद 2011 में समाप्त हो गई और निर्माण शुरू नहीं हो सका। बाद में खंडूड़ी सरकार ने नियमावली बदली तो रिवाइज मैप कम्पाउंडिंग के लिए जमा करा दिया गया।
अब तीन महीने की अलग अलग बैक डेट के नोटिस बनवाकर विगत दस जुलाई को घर गिराने का आदेश दर्शाया और दो दिन पहले नोटिस चस्पा कर चार अगस्त को मकान गिराने को कहा है। चस्पाने के बाद फोटो खींचा और खुद ही फाड़ दिया।
इस मामले में एमडीडीए का पक्ष लेने के लिए वीसी आर मीनाक्षी सुंदरम व सचिव पीसी दुम्का से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन दोनों ही अधिकारियों ने फोन नहीं उठाया। पांडेय इस मामले को लेकर और सीडी प्रकरण को लेकर उच्च न्यायालय चले गए है।
वह सोमवार को एक रिट दाखिल कर पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग करेंगे। यदि उच्च न्यायालय से कुछ राहत नहीं मिली तो फिर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।