उत्तराखंड समाज कल्याण विभाग के सचिव के बाद खुद मुख्य सचिव ने लैपटाप की जिस विवादित खरीद को रोकने की बात लिखित में कही, उसे मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दरकिनार करते हुए खरीद जारी रखने के आदेश कर दिए।
यही नहीं उन्होंने उत्तराखंड काडर के अफसरों पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे दिल्ली से प्रतिनियुक्ति पर आए सूचना एवं तकनीकी सचिव दीपक गैरोला के पीछे पड़े हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने विवादित खरीद प्रक्रिया को बिल्कुल दुरुस्त होने की बात भी कही।
गर्वनमेंट ई-मार्केट प्लेस के जरिये अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्र-छात्राओं में वितरित करने के लिए खरीदे गए महंगे लैपटाप से जुड़े मामले में नया मोड़ आया है। सचिव और मुख्य सचिव की ओर से लैपटाप खरीद पर लगाई गई रोक को सीएम ने समाप्त करते हुए खरीद जारी रखने को कहा है।
आदेश के साथ फाइल मुख्य सचिव के कार्यालय पहुंची तो सभी हैरान रह गए। गौरतलब है कि खरीद रोकने के अलावा सचिव समाज कल्याण डॉ. भूपिंदर कौर औलख और मुख्य सचिव एस. रामास्वामी ने सूचना एवं तकनीकी सचिव को भेजे गए पत्र में यह भी कहा था कि मामले पर आख्या दें और ई-टेंडरिंग न किए जाने की वजह भी पूछी थी। लेकिन, सूचना एवं तकनीकी सचिव दीपक गैरोला ने सचिव और मुख्य सचिव को आख्या भेजने के बजाय फाइल सीधे मुख्यमंत्री के यहां भिजवा दी।
इसमें लिखा गया कि खरीद में हर तरह की सावधानी बरती गई है और खरीद नियमावली का पालन किया गया है। यह भी बताया गया कि भारत सरकार के डायरेक्टर जनरल सप्लाई एंड डिस्पोजल (डीजीएसएनडी) के बंद होने के चलते ही गर्वनमेंट ई-मार्केट प्लेस से खरीद की गई।
हालांकि इस बात को स्पष्ट नहीं किया गया है कि सारी खरीद एक ही डीलर द्वारा दिए गए विभिन्न माडल में से की गई है। अन्य डीलरों या कंपनियों से रेट नहीं लिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि गर्वनमेंट ई-मार्केट प्लेस से खरीद प्रक्रिया पूरी करने के पूर्व मार्केट सर्वे भी नहीं किया गया है। सर्वे होता तो मूल्य को लेकर की स्थिति स्पष्ट हो जाती।
खरीद प्रक्रिया में कहीं कोई दिक्कत नहीं है। भारत सरकार की ओर से निर्धारित मानकों का पालन किया गया है। सचिव सूचना एवं तकनीकी दीपक गैरोला बेहतर कार्य कर रहे हैं। दूसरा काडर होने की वजह उत्तराखंड के अधिकारी उन्हें काम नहीं करने दे रहे हैं।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री