उत्तराखंड में समाचार पत्र वितरकों को भी अब सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गुरूवार को इस संबंध में श्रम सचिव आरके सुधांशु को निर्देश दिए। इस संबंध में अमर उजाला ने मुख्यमंत्री को अनुरोध पत्र दिया था कि समाचार पत्र वितरकों को भी केंद्र और राज्य की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल किया जाए।
सरकार के इस कदम से प्रदेश के करीब 5000 समाचार पत्र वितरकों को लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि अमर उजाला के प्रयासों से उत्तर प्रदेश सरकार ने भी समाचार पत्र वितरकों को असंगठित कर्मकार अधिनियम के तहत पंजीकृत करना शुरू कर दिया है।
पंजीकरण के बाद उन्हें बीमा, स्वास्थ्य एवं अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। यह एक बिडंबना है कि मीडिया जैसे प्रभावशाली पेशे की रीढ़ की हड्डी होने के बावजूद किसी भी मीडिया ग्रुप ने समाचार पत्र वितरकों को सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में कवर करवाने का कोई प्रयास नहीं किया।
जबकि भवन निर्माण मजदूरों तक को इन योजनाओं में बड़े सरकारी लाभ मिल रहे हैं। खैर, अमर उजाला ने इसकी पहल कर दी है और रोशनी की किरण भी नजर आने लगी है। कौन नहीं जानता कि समाचार पत्र वितरकों का कार्य महत्वपूर्ण होने के साथ ही चुनौतीपूर्ण भी है।
बरसात, गर्मी, सर्दी कुछ भी हो, लेकिन अखबार का वितरण करना ही है। हड़ताल या दंगों जैसी स्थिति में भी समाचार पत्र वितरक किसी सिपाही की तरह ही पेश आते हैं। इतना होने के बावजूद इस बड़े वर्ग के लिए किसी तरह के सरकारी लाभ व सामाजिक सुरक्षा की किसी योजना में कवर नहीं है।
अमर उजाला ने इस प्रस्ताव का ड्राफ्ट बनाकर गुरुवार को बीजापुर में मुख्यमंत्री को सौंपा। अमर उजाला मुख्यमंत्री का आभारी है कि पलक झपकते उन्होंने यह प्रस्ताव न केवल मान लिया, बल्कि उसे जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाने के भी निर्देश दिए हैं।
समाचार पत्र वितरकों को इसका लाभ जल्द से जल्द मिले, इसे सुनिश्चित कराने के लिए समंवय की जिम्मेदारी मीडिया सलाहकार सुरेंद्र अग्रवाल को सौंपी है।
अग्रवाल ने कहा कि वे मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप समाचार पत्र वितरकों को असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम 2008 के तहत सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाए जाने की व्यवस्था शीघ्र सुनिश्चित की जाएगी। राजाज्ञा जारी होते ही वितरकों को पंजीकरण होगा और फिर उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं को लाभ स्वत: ही मिलने लगेगा।