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स्वामी शिवानंद से उत्तराखंड मुख्यमंत्री ने की बात, लेकिन मातृसदन ने ठुकराया आग्रह

Wed, 31 May 2017 03:50 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार
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shivanand
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गंगा में खनन के खिलाफ छह दिन से जल त्याग ‌कर अनशन कर रहे स्वामी शिवानंद से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने फोन पर वार्ता की और जल लेने का आग्रह किया। लेकिन स्वामी शिवानंद ने बिना खनन बंद किए जल लेने का आग्रह ठुकरा दिया। वहीं जल के बिना एक एक दिन बढने पर स्वामी शिवानंद की तबियत हर दिन गिरती जा रही है।
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गंगा में वन विकास निगम का खनन खोलने के खिलाफ मातृसदन का तप/आंदोलन 14 मई से जारी है। ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के 11 दिन तक तप/अनशन के बाद से मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद उग्र तप कर रहे हैं। छह दिन पहले स्वामी शिवानंद जल भी त्याग चुके हैं। जल त्यागने के दूसरे दिन स्वामी शिवानंद ने मौन भी धारण कर लिया था। 
हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों के पुलिस बल के साथ ताले काटकर आश्रम में प्रवेश करने पर स्वामी शिवानंद को मौन तोडना पड़ा था। बहरहाल मातृसदन से जुड़े हरिद्वार और देहरादून के कुछ गंगा प्रेमी मंगलवार की रात देहरादून पहुंचे और मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को स्वामी शिवानंद के उग्र तप की जानकारी दी। तभी सीएम ने दूरभाष पर स्वामी शिवानंद से वार्ता की। स्वामी शिवानंद का कहना था कि यदि गंगा में खनन आपके राज्य की जरूरत बन गया है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
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सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने स्वामी शिवानंद से जल लेने का आग्रह करते हुए कहा कि वैज्ञानिक ने गंगा में खनन को जरूरी बताया है। इस पर स्वामी शिवानंद का कहना था कि वे जल ले लेंगे मगर गंगा में खनन तत्काल बंद किया जाए। साथ ही स्वामी शिवानंद ने कहा कि जिस वैज्ञानिक ने गंगा में खनन को जरूरी बताया है, वे उसे चैलेंज करते हैं।

यदि वैज्ञानिक को गलत साबित कर दिया तो क्या सीएम उसपर कार्रवाई करेंगे। इतना सुनकर मुख्यमंत्री ने कॉल काट दी। स्वामी शिवानंद ने बुधवार को जल छोडने के छठे दिन भी दोहराया कि खनन बंद होने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होने तक उग्र तप जारी रहेगा।      
     
धुएं से गले में इन्फेक्शन, आवाज हुई मंद      
प्रशासन ने स्वामी शिवानंद को फोर्स फीडिंग कराने के लिए चार दिन पहले पुलिस बल के साथ आश्रम में जबरन प्रवेश किया था। इस दौरान लोहे की तारबाड़ और ताले काटने के लिए ईंधन से चलने वाले कटर का इस्तेमाल किया गया। ताले काटने के दौरान स्वामी शिवानंद का कमरा धुंए से भर गया था। जिसके चलते उनके गले में इन्फेक्शन बताया जा रहा है।

्रआवाज भी इसी कारण बहुत मंद हो गई है। स्वामी शिवानंद ने बेहद हल्की आवाज में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि धुंए के कारण शरीर के कई अंग प्रभावित हुए हैं। सीने में दर्द की शिकायत भी होने लगी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के इशारे पर उनकी हत्या की साजिश रची गई।       

आश्रम के बाहर राजस्व कर्मचारी भी तैनात      
अभी तक पुलिस और खुफिया विभाग ही मातृसदन के आंदोलन पर नजर रख रहा था। मगर अब तहसील के अमीन, लेखपाल आदि की डयूटी भी लगा दी गई है। मातृसदन की ओर से राजस्व और खुफिया विभाग के कर्मचारियों को अंदर नहीं आने दिया गया है। केवल पुलिसकर्मी ही मातृसदन में संतो के साथ मौजूद हैं। ब्रह्मचारी दयानंद ने बताया कि पूर्व में भी कई बार राजस्व कर्मचारियों को मातृसदन में तैनात किया गया। तब राजस्व कर्मचारियों की ओर से मातृसदन पर झूठे आरोप लगाकर थाने में तहरीर दी गई। कई और कर्मचारियों ने भी आश्रम में आकर गलत करने का प्रयास किया। इसलिए राजस्व कर्मचारियों को गेट के बाहर ही प्रसाद इत्यादि दिया जाएगा मगर अंदर आने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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