मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना (एमएसबीवाई) की रिलांचिंग फिर टल गई है। करार से पहले ही बीमा कंपनी के विवादों से घिरने के बाद सरकार नए सिरे से टेंडर करने जा रही है।
मौजूदा टेंडर लेने वाली कंपनी को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इस खींचतान के चलते लोगों को योजना के तहत फिलहाल 50 हजार तक का उपचार ही मिल सकेगा। एक अप्रैल-2015 को सरकार ने आनन-फानन में एमएसबीवाई की शुरूआत की। छह माह के लिए बीमा कंपनी से करार किया गया।
सरकार ने अक्तूबर में योजना को नए सिरे से लांच करने की योजना बनाई, लेकिन इस पर काम नहीं हो सका। जिसके बाद सितंबर में करार खत्म होने पर सरकार ने उसी कंपनी का करार दो माह के लिए बढ़ा दिया। सरकार ने योजना के तहत मिलने वाले कवर की धनराशि 50 हजार से बढ़ाकर पौने दो लाख कर एक दिसंबर को योजना को रिलांच करने की तैयारी की।
इसके लिए नए सिरे से टेंडर भी हो गए। लेकिन जिस कंपनी को टेंडर मिला, वह करार से पहले ही विवादों में आ गई। साथ ही पौने दो लाख के कवर के लिए कंपनी ने जितना प्रीमियम दिया, खुद सरकार उसे कम मान रही है। ऐसे में अब उस कंपनी को बाहर का रास्ता दिखाकर दोबारा टेंडर प्रक्रिया करने की कवायद चल रही है।
ऐसा हुआ तो जनवरी में कंपनी की रिलांचिंग टलनी तय है। क्योंकि टेंडर और नई बीमा कंपनी से करार में एक माह से ज्यादा का समय लगेगा। जिसके चलते लोगों को जनवरी से भी बढ़े हुए बीमा कवर का लाभ नहीं मिल सकेगा।
योजना के लिए नई बीमा कंपनी से करार किया जाना है। सरकार इस मामले में किसी भी तरह के विवाद में नहीं पड़ना चाहती। जल्दीबाजी में करार के बाद अगर भविष्य में भुगतान की समस्या हुई तो मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ेगी।
- डॉ. प्रेमलाल, नोडल अधिकारी, एमएसबीवाई